भोपाल। Maulana Azad National Institute of Technology Bhopal (मैनिट) के आर्किटेक्चर एवं प्लानिंग विभाग के विद्यार्थियों ने प्रोफेसर डॉ. जगदीश सिंह के साथ के भोपाल की ऐतिहासिक धरोहर Rani Kamlapati Palace के आसपास हो रहे विकास कार्यों का हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट (HIA) अध्ययन किया है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि आसपास के निर्माण और शहरी विकास का इस ऐतिहासिक महल पर क्या प्रभाव पड़ रहा है और भविष्य में इसके संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
रानी कमलापति महल का निर्माण गोंड शासक निज़ाम शाह की पत्नी रानी कमलापति द्वारा कराया गया था। यह महल भोपाल की ऊपरी झील के किनारे बने ऐतिहासिक तटबंध भोजपाल पर स्थित है, जिसका निर्माण राजा भोज द्वारा कराया गया था। यह दो मंजिला महल अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए जाना जाता है। इसमें लखौरी ईंटों का उपयोग, खूबसूरत मेहराबें, नक्काशीदार स्तंभ, कमल की पंखुड़ी जैसी कंगूरियाँ और आकर्षक छज्जे इसकी विशेष पहचान हैं। इसकी स्थापत्य शैली में गोंडवाना, मालवा और मुगल-राजपूत शैली का सुंदर मेल दिखाई देता है।
इस अध्ययन में शामिल करीब 30 विद्यार्थियों ने महल के आसपास के क्षेत्र में हो रहे शहरी विकास, यातायात, पर्यटन गतिविधियों, झील के किनारे के पर्यावरण और स्मारक के दृश्य परिदृश्य का अवलोकन और विश्लेषण किया। अध्ययन में यह सामने आया कि रानी कमलापति महल भोपाल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है और शहर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विद्यार्थियों ने सुझाव दिया कि महल के आसपास विकास कार्य करते समय विरासत संरक्षण को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील और संतुलित योजना बनाई जानी चाहिए, ताकि इस ऐतिहासिक स्मारक की सुंदरता, महत्व और पहचान सुरक्षित रह सके।
रानी कमलापति महल राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक है और इसका संरक्षण Archaeological Survey of India द्वारा किया जाता है। यह स्थल आज भोपाल के प्रमुख पर्यटन और ऐतिहासिक आकर्षणों में शामिल है।
मैनिट के विद्यार्थियों द्वारा किया गया यह अध्ययन शहर के विकास के साथ-साथ विरासत संरक्षण और जिम्मेदार शहरी नियोजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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