March 24, 2026

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मुहब्बत के तकाजे इन्हीं से जिंदा : पंकज जगा रहे सेहरी और श्याम की इफ्तार दावत

 जैन कर रहे हाफिज का स्वागत : भाईचारा का संदेश और निभा रहे बरसों की परम्परा 

खान आशु, भोपाल

लोग कहते हैं जमाना बदल रहा है, लोग बदल गए हैं, आपसी भाईचारा खत्म हो गया है और नफरतें समाज में पैर पसार रही हैं। लेकिन यह कयास अगर देखे जाएं तो बहुत ही सतही और व्हाट्स एप इंडस्ट्री से आगे नहीं कही जा सकते। इससे आगे बढ़कर अगर देखा जाए तो बरसों की परम्परा को नितेश जैन आज भी निभा रहे हैं, महाकाल के परम भक्त पंकज शर्मा आज भी सेहरी और इफ्तार का वक्त याद दिला रहे हैं और पंडित श्याम मिश्रा अब भी अपने मित्र के लिए इफ्तार दावत आयोजित कर रहे हैं। सब कुछ वैसा ही है, बस लोगों की बातों का विषय बदलकर सियासी जामा पहन चुका है। आपसी भाईचारा, प्रेम और एक दूसरे की आस्था के लिए समर्पण समाज में अब भी जिंदा है, और हमेशा रहने वाला है।

पीरगेट की पुरानी बस्ती और इसमें आमने सामने बरसों से रह रहे नितेश जैन और हाफिज लईक। जैन साहब किराना दुकान चलाते हैं और हाफिज लईक उनके सामने स्थित मस्जिद सब्जी फ़रोश के ईमाम हैं। सिलसिला कब और कैसे शुरू हुआ, यह नितेश जैन को अब ठीक से याद नहीं, लेकिन यह दौर उनके भाई से शुरू हुआ, जो बरसों बाद भी अनवरत जारी है। हाफिज लईक साहब ने मस्जिद सब्जी फ़रोश में नमाज ए तरावीह का मुकम्मल 14 दिन में किया, सभी मुक्तदियों से मुलाकात से फारिग होकर मस्जिद के बाहर की पहली मुलाकात वे नितेश जैन के परिवार से करते हैं। यहां उनका फूलों से स्वागत भी होता है और मुंह मीठा भी कराया जाता है। कुछ तोहफों का आदान प्रदान की रस्म भी अदा की जाती है और बाद में दुआ ए खैर भी यहां की जाती है। मस्जिद से बांटे गए तबर्रुक को जैन साहब अकीदत के साथ अपने अजीजों को खिलाते हैं, इस आस्था और अकीदत के साथ कि इससे तमाम मर्ज भी दूर होंगे और इसका सवाब भी हासिल होगा। नितेश जैन कहते हैं कि बदला कुछ भी नहीं, अगर हम अपने अंदर सबको इंसान समझने की जरूरत को जिंदा रखेंगे तो सबकुछ वैसा ही लगेगा, जैसा पहले था।

महाकाल भक्त का सेहरी जागरण
माथे पर तिलक, हाथ में कलावा, गले रुद्राक्ष की माला…! देखने वाले के लिए प्रखंड पंडित। लेकिन पंकज शर्मा के मन के जितने करीब महाकाल हैं, उतने ही बड़े अनुयायि वे हज़रत नाहर शाह वली दरगाह के भी हैं। बुधवार को श्रीगणेश मंदिर में उनका माथा टिकता है तो जुमेरात का कर्म नाहर शाह वली दरगाह पर भी अकीदत की हाजिरी का होता है। मुहर्रम में कर्बला और रमजान में रोज़ा रखने की भी पंकज शर्मा की नियमितता है। हर सुबह सुविचार के साथ लोगों को महाकाल दर्शन करवाने वाले पंकज शर्मा माह ए रमजान में लोगों को सेहरी भी जगा रहे हैं। सोशल मीडिया को एक बेहतर ऑप्शन बनाते हुए उन्होंने एक व्हाट्स एप ग्रुप भी क्रिएट किया है। फेसबुक पर भी वे एक्टिव हैं और लोगों को सेहरी और इफ्तार के वक्त से आगाह करते हैं। पंकज शर्मा के इस रमजान ग्रुप में सिर्फ मुस्लिम ही नहीं, बल्कि सर्वधर्म समभाव रखने वाले सनातनी भी मौजूद हैं। इस ग्रुप में रोजा इफ्तार वक्त के अलावा हदीस की बेहतर तालीम भी परोसी जा रही है। पेशे से पत्रकार पंकज शर्मा अपनी लेखनी के माहिर तो हैं ही, अपने सामाजिक कामों से ज्यादा लोकप्रिय हैं।

पंडित श्याम मिश्रा की इफ्तार दावत
कोई बड़ा तामझाम या भव्यता नहीं होती। किसी होटल की टेबल, किसी गली के पटिए या ठेले पर लगे किसी खोमचे पर यह आयोजन होता है। मस्जिद पास हो, इसका ख्याल रखा जाता है, ताकि नमाज ए मगरिब आसानी से अदा हो सके। दावत होती है पंडित श्याम मिश्रा के करीबी मित्र अशफाक उल्लाह खान की। इफ्तार लायक जो जरूरी सामान होता है, अरेंज करके यह महफिल सजाई जाती है। कभी कभार इस मौके को भैयालाल मारन और भरत विश्वकर्मा भी शोभित करते हैं। दो दशक का यह सिलसिला विकट हालात में भी अपना वजूद बनाए रखे है। पंडित श्याम मिश्रा की श्रीमती के लिए भजन, कथा या धार्मिक ग्रंथों का इंतजाम अक्सर तोहफे के रूप में अशफाक कर देते हैं तो अशफाक को जमजम का पानी, तस्बीह या जानमाज पंडित श्याम मिश्रा से तोहफे में मिल जाया करती है।

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