March 24, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ में भू-जल संरक्षण कार्यों का किया अध्ययन प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों ने

रायपुर

छत्तीसगढ़ में जल एवं मृदा संरक्षण के क्षेत्र में वन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्य अब राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण बनते जा रहे हैं। इन्हीं कार्यों के अध्ययन के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून से भारतीय वन सेवा (IFS) वर्ष 2025-26 बैच के 133 प्रशिक्षु अधिकारी अध्ययन दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। यह दल 8 से 15 मार्च तक प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर वन विभाग द्वारा किए गए भू-जल संरक्षण और जल संवर्धन कार्यों का अध्ययन कर रहे हैं।

प्रशिक्षण के पहले चरण में 9 मार्च को दक्षिण सिंगपुर परिक्षेत्र के पम्पार नाला का भ्रमण कराया गया। यहां अधिकारियों को बताया गया कि किस प्रकार तकनीकी उपायों के माध्यम से मिट्टी के कटाव को रोका गया और जल स्तर बढ़ाने में सफलता मिली।

इस दौरान अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक शालिनी रैना और मुख्य वन संरक्षक मणिवासगन एस. सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशिक्षु अधिकारियों को क्षेत्रीय कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। धमतरी वनमंडलाधिकारी श्री जाधव श्रीकृष्ण ने बताया कि पम्पार नाला क्षेत्र में ब्रशवुड चेकडेम, लूज बोल्डर संरचना और गेबियन संरचना बनाए गए हैं, जिनसे मिट्टी का कटाव कम हुआ है। साथ ही ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पानी और वन्यजीवों को सालभर जल उपलब्ध होने लगा है। प्रशिक्षु अधिकारियों को बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए उन्हें आठ समूहों में विभाजित किया गया है, जिनका मार्गदर्शन राज्य के विभिन्न जिलों से आए अनुभवी डीएफओ कर रहे हैं।

अध्ययन दौरे के दौरान दल कुसुमपानी, कांसा और साजापानी नालों का भी भ्रमण करेगा तथा वनधन विकास केंद्र, दुगली में वन प्रबंधन से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त करेगा। यह अध्ययन दौरा इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और मृदा संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास देश के लिए एक मॉडल बनते जा रहे हैं।

Spread the love