नई दिल्ली
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। भारत के पूर्व राजनयिक अशोक सज्जनहर ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान तनाव कम होने के संकेत दे रहे हैं। सज्जनहर के मुताबिक, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ अभियान शुरू किया था, तब जो लक्ष्य तय किए गए थे, वे पूरी तरह हासिल नहीं हो पाए। इसी वजह से अब अमेरिका अपनी रणनीति बदलता दिख रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पर अंदरूनी और बाहरी दोनों तरह का दबाव बढ़ रहा है। देश में बढ़ती महंगाई, तेल की कीमतों में उछाल और युद्ध के खिलाफ विरोध जैसे कारण भी फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका में आने वाले चुनाव भी एक बड़ा फैक्टर हैं।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लेते हुए ईरान के पावर प्लांट्स पर होने वाले हमलों को 5 दिनों के लिए टाल दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच “अच्छी और सकारात्मक बातचीत” चल रही है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच युद्ध अपने चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है और पूरी दुनिया ऊर्जा संकट को लेकर चिंतित है। पहले ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी थी कि अगर उसने होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला, तो अमेरिका कड़े हमले करेगा। इसके जवाब में ईरान ने भी धमकी दी थी कि वह पूरे क्षेत्र के तेल और ऊर्जा ढांचे को निशाना बना सकता है।
सज्जनहर ने पाकिस्तान को लेकर भी बयान दिया और कहा कि पाकिस्तान इस मामले में भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं है। उनके अनुसार, पारंपरिक मध्यस्थ जैसे ओमान और कतर ज्यादा प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। ट्रंप का रुख नरम होना और हमलों को टालना इस बात का संकेत है कि अब युद्ध से ज्यादा बातचीत पर जोर दिया जा रहा है। अगर यह प्रक्रिया जारी रहती है, तो मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो सकता है।

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