March 25, 2026

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11 मिनट में फुल चार्ज, चीनी कंपनी ने बनाई क्रांतिकारी बैटरी, खत्म होगी बैटरी की सबसे बड़ी चिंता

 नई दिल्ली

इलेक्ट्रिक कार्स को दुनिया भर में बढ़ावा दिया जा रहा है. हालांकि, अभी भी बड़ी संख्या में इन्हें ग्राहक नहीं मिल रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह बैटरी को चार्ज होने में लगने वाला वक्त और ईवी की रेंज है. जहां पेट्रोल या डीजल कार में कहीं भी फ्यूल डलवाया जा सकता है. वहीं ईवी के चार्जिंग स्टेशन कम है। 

इसके अलावा ईवी को चार्ज होने में भी वक्त लगता है. इसका समाधान चीनी ऑटोमोबाइल कंपनी BAIC (बीजिंग ऑटोमोटिव ग्रुप कंपनी लिमिटेड) ने खोज लिया है. बीएआईसी ने सोडियम-आयन बैटरी टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट में एक महत्वपूर्ण सफलता का ऐलान किया है. BAIC चीन का एक प्रमुख कार निर्माता है. कंपनी इलेक्ट्रिक और ICE दोनों तरह की कार्स बनाती है। 

कंपनी के रिसर्च डिविजन के मुताबिक, एक प्रोटोटाइप सोडियम-आयन बैटरी विकसित की गई है, जिसकी एनर्जी डेंसिटी 170 Wh/kg है. ये बैटरी 4C फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है. इसे फुल चार्ज होने में सिर्फ 11 मिनट का वक्त लगेगा. ये चार्जिंग टाइम टेस्टिंग कंडीशन का है. रियल वर्ल्ड में चार्जिंग का वक्त ज्यादा हो सकता है. इस सिस्टम को अलग-अलग टेम्परेचर पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। 

लो टेम्परेचर में भी करेगी काम
इसे -40 डिग्री सेल्सियस से 60 डिग्री सेल्सियस तक काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. कंपनी का दावा है कि -20 डिग्री सेल्सियस पर भी बैटरी रिटेंशन लगभग 92 परसेंट है. ये दिखाता है कि कम तापमान में भी इसे इस्तेमाल किया जा सकता है. कंपनी ने बताया है कि बैटरी ने इंटरनल वैलिडेशन टेस्टिंग को पास कर लिया है। 

थर्मल टेस्टिंग में 200 डिग्री सेल्सियस तक के टेम्परेचर पर भी बैटरी स्टेबल थी. ये सोडियम-आयन बैटरी कंपनी की अरोरा बैटरी प्रोग्राम का हिस्सा है. इसमें लिथियम आयन बैटरी, सॉलिड स्टेट और सोडियम आयन बैटरी शामिल हैं. कंपनी ने प्रिजमैटिक सोडियम-आयन सेल्स के लिए मास प्रोडक्शन प्रॉसेस वैलिडेशन भी पूरा कर लिया है. 

पूरे चीन में सोडियम आयन बैटरियों को एडिशनल सॉल्यूशन के तौर पर देखा जा रहा है. खासकर कम लागत और ठंडे मौसम वाले यूजेज के लिए. लिथियम-आयन फॉस्फेट बैटरियों की तुलना में, सोडियम-आयन बैटरियों में रॉ मैटेरियल आसानी से मिल जाता है. साथ ही इनकी कोल्ड-वेदर परफॉर्मेंस बेहतर होती है. हालांकि एनर्जी डेंसिटी के मामले में ये अभी पीछे हैं। 

कई कंपनियां कर रही हैं काम
बीएआईसी (BAIC) ने इस प्रोग्राम से जुड़े लगभग 20 पेटेंट फाइल किए हैं. ये पेटेंट्स मटेरियल, सेल डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग प्रॉसेस और टेस्टिंग से जुड़े हैं. कंपनी चार्जिंग स्ट्रैटेजी, इलेक्ट्रोकेमिकल मॉडलिंग और बैटरी डिग्रेडेशन पर भी काम कर रही है. दूसरी चीनी कंपनियां भी इस टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम कर रही हैं। 

फरवरी 2026 में चांगान ऑटोमोबाइल और सीएटीएल ने पहली मास-प्रोड्यूस्ड सोडियम-आयन इलेक्ट्रिक कार पेश की. इसमें 45 kWh की बैटरी और 400 किमी से ज्यादा की रेंज का दावा किया गया है. ये कार 2026 मिड तक बाजार में लॉन्च हो सकती है। 

BAIC (बीजिंग ऑटोमोटिव ग्रुप कंपनी लिमिटेड) की बात करें, तो कंपनी ने अभी तक अपनी सोडियम-आयन बैटरी के कमर्शियल लॉन्च की जानकारी नहीं दी है. फिलहाल ये टेक्नोलॉजी प्री-कमर्शियल स्टेज में है। 

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