March 28, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

पश्चिम एशिया तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित, खाद्य तेलों की कीमतों में 20 रुपये तक उछाल

चंडीगढ़ 

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब आम आदमी की रसोई तक पहुंच गया है। खाद्य तेलों की कीमतों में पिछले एक महीने में 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक का उछाल दर्ज किया गया है। कारोबारियों का कहना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो कीमतों में और तेजी बनी रह सकती है।

कारोबारियों के अनुसार युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इससे बायोडीजल की मांग बढ़ी है, जिसके कारण वनस्पति तेलों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 60 से 66 प्रतिशत खाद्य तेल आयात करता है। सामान्य तौर पर देश हर महीने 13 से 14 लाख टन आयात करता है, लेकिन मार्च में यह घटकर करीब 11 लाख टन रहने का अनुमान है।

खासतौर पर सूरजमुखी तेल के आयात में भारी गिरावट आई है, जो फरवरी में लगभग 51 प्रतिशत तक कम हो गया। आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और लगातार बढ़ती कीमतें इसकी मुख्य वजह हैं। युद्ध के कारण समुद्री मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे जहाजों की आवाजाही और डिलीवरी पर असर पड़ा है।

समुद्री किराया भी 60 डॉलर प्रति टन बढ़ा
खाद्य तेल कारोबारी संजय विरमानी के मुताबिक समुद्री रास्तों में बाधा और बढ़ते जोखिम के कारण बीमा कंपनियां भी माल कवर करने से हिचक रही हैं। वहीं समुद्री किराया भी प्रति टन करीब 60 डॉलर तक बढ़ गया है। ब्राजील और अर्जेंटीना से आने वाले शिपमेंट भी प्रभावित हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बायोडीजल में बढ़ती खपत से भी बाजार पर दबाव बढ़ा है। राइस ब्रान की उपलब्धता घटने से राइस ब्रान ऑयल का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसकी कीमत पिछले साल 350 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर अब करीब 700 रुपये तक पहुंच गई है।

20 से 30 प्रतिशत तक हो सकती है वृद्धि
इसका असर बाजार में साफ दिख रहा है। सरसों तेल 132.50 से बढ़कर 147 रुपये, सोया रिफाइंड 131.20 से 150.10 रुपये और सनफ्लावर रिफाइंड 160 से 175 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो खाद्य तेलों की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ेगी।

Spread the love