April 5, 2026

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सशक्त नारी ही सशक्त समाज एवं राष्ट्र की आधारशिला है : नुसरत मेहदी

  • शक्ति सम्मान एवं ‘कुटुंब प्रबोधन’ विषय पर व्याख्यान

भोपाल। अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, भोपाल इकाई के तत्वावधान में बैशाख कृष्ण पक्ष प्रतिपदा (नवसंवत्सर), विक्रम संवत 2083 के अवसर पर ‘शक्ति सम्मान’ एवं व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘कुटुंब प्रबोधन’ रहा। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. बिनय षडंगी राजाराम ने अपने उद्बोधन में कहा कि “भारतीय परिप्रेक्ष्य में कुटुंब की अवधारणा अत्यंत व्यापक है। यह परिवार से समाज, समाज से राष्ट्र और अंततः ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ तक विस्तृत होती है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में कुटुंब एक शक्ति के रूप में स्थापित है और इसकी मूल संरचना का आरंभ श्वेतकेतु द्वारा माना जाता है।”

विशिष्ट अतिथि सुश्री शीला दाहिमा ने अपने विचार रखते हुए परिवारों में बढ़ती संवादहीनता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि “आज के समय में परस्पर संवाद की निरंतरता अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर नई पीढ़ी के लिए, जो आधुनिक माध्यमों में अधिक व्यस्त होती जा रही है।”

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. नुसरत मेहदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि “‘शक्ति सम्मान’ केवल महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान नहीं, बल्कि कुटुंब प्रबोधन की उस मूल भावना का उत्सव है, जिसमें नारी को परिवार और समाज की धुरी के रूप में स्वीकार किया जाता है।” उन्होंने आगे कहा कि सशक्त नारी ही सशक्त कुटुंब का निर्माण करती है और यही सशक्त समाज एवं राष्ट्र की आधारशिला है।”

बीज वक्तव्य देते हुए श्रीमती सुनीता यादव ने बताया कि “अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, भोपाल इकाई नवसंवत्सर के अवसर पर प्रतिवर्ष विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली मातृशक्तियों को सम्मानित करती है। इस वर्ष भी 21 महिलाओं को ‘शक्ति सम्मान’ से अलंकृत किया गया। उन्होंने विक्रम संवत की परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि इसकी शुरुआत राजा विक्रमादित्य द्वारा की गई थी, जो आज तक निरंतर प्रचलित है।”

कार्यक्रम में प्रशासनिक सेवा (आईएएस) हेतु सुश्री शीला दाहिमा तथा ‘नेपथ्य की शक्ति’ के लिए श्रीमती लता कर्णावट को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली अन्य महिलाओं को भी सम्मानित किया गया, जिनमें सुनीता शर्मा ‘सिद्धि’ (अमृत शक्ति सम्मान), रिज़वाना शेख़ (परिचालिका), ज्योति रात्रे (पर्वतारोहण), शानू सिंह (मनोचिकित्सक), योगिता सिंह (वास्तुविद्), डॉ. विनीता श्रीवास्तव (संपादक), आरती मीणा (पाककला), प्रीति तिवारी (नृत्य), अनिता सक्सेना (मांडणा कला), गरिमा मथनिया (आर्ट एंड क्राफ्ट), डॉ. सुचिता राऊत (चित्रकार), कविता अग्रवाल (योगाचार्य), सरोज शर्मा (रंगकर्मी), प्रियंका माहेश्वरी (उद्घोषिका), श्रद्धा गुप्ता (गायन), चित्रा धोटे (अधिवक्ता), रीना कालरा (शिक्षिका) एवं डॉ. अनुसुईया बमनिया (चिकित्सक) प्रमुख रहीं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रतिभा द्विवेदी ने किया। प्रारंभ में सरस्वती वंदना खुशी विजयवर्गीय द्वारा एवं परिषद गीत अंशु वर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया। अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, भोपाल इकाई की ओर से सभी साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों एवं नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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