April 12, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

मध्य प्रदेश में नर्सिंग भर्ती में 100% महिला आरक्षण, हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- जेंडर आधारित भेदभाव क्यों?

जबलपुर
 मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में महिलाओं को सौ प्रतिशत आरक्षण देने को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने सरकार से पूछा है कि जेंडर के आधार पर भेदभाव क्यों किया जा रहा है।

दरअसल, प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर 800 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। मामले पर अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।

संतोष कुमार लोधी सहित कई अन्य पुरुष अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर हाल ही में जारी नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने बताया कि कर्मचारी चयन मंडल द्वारा दो अप्रैल, 2026 को जारी विज्ञापन (नर्सिंग ऑफिसर व सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026) में नर्सिंग आफिसर के सौ प्रतिशत पद केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिया गया है।

पुरुष अभ्यर्थी पूरी तरह से वंचित हो गए
इससे योग्य पुरुष अभ्यर्थी आवेदन करने से पूरी तरह वंचित हो गए हैं। दलील दी गई कि मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2023 के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पद के लिए कोई लिंग-आधारित प्रतिबंध नहीं है। मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन में किया गया यह प्रविधान वैधानिक नियमों के विपरीत है।

100 प्रतिशत पदों पर आरक्षण को हटाया जाए
तर्क दिया गया है कि पुरुष और महिला दोनों एक ही पाठ्यक्रम (बीएससी नर्सिंग/जीएमएम) पढ़ते हैं और उनके पास समान योग्यता व पंजीकरण होता है।

केवल जेंडर के आधार पर सार्वजनिक रोजगार से पूर्णतः बाहर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है। मांग की गई है कि विज्ञापन के उस हिस्से को निरस्त किया जाए जो 100 प्रतिशत पदों को महिलाओं के लिए आरक्षित करता है।

 

Spread the love