April 13, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

आ रहा है 20 हजार करोड़ का मेगा NSE IPO!  हर निवेशक नहीं लगा पाएगा पैसा

NSE IPO : शेयर बाजार में लंबे समय से जिस IPO का इंतजार था, वो अब हकीकत बनने के बेहद करीब है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE का चर्चित पब्लिक इश्यू सिर्फ अपने बड़े साइज की वजह से नहीं, बल्कि अपने अलग स्ट्रक्चर और सख्त नियमों के कारण भी चर्चा में है। करीब 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के इस ऑफर में हर निवेशक सीधे शामिल नहीं हो पाएगा, और यही बात इसे बाकी IPO से अलग और ज्यादा दिलचस्प बनाती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्सचेंज जून में SEBI के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल कर सकता है। लेकिन ये कोई आम IPO नहीं है, इसमें खास नियम और तरीका अपनाया जा रहा है।

ऑफर फॉर सेल का खास स्ट्रक्चर

ये पूरा IPO ऑफर फॉर सेल यानी OFS के रूप में तैयार किया गया है। मतलब, सिर्फ मौजूदा शेयरहोल्डर ही अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। कंपनी को खुद एक भी पैसा नहीं मिलेगा। सारे पैसे उन शेयरहोल्डर्स के खाते में जाएंगे जिनके पास अभी NSE के शेयर हैं। कुल मिलाकर NSE की 4 से 4.5 प्रतिशत इक्विटी बेची जाएगी।

कीमत तय करने के लिए बुक बिल्डिंग प्रोसेस का इस्तेमाल होगा, यानी निवेशकों की मांग और मार्केट की हालत देखकर फाइनल प्राइस निकलेगा। अभी शेयरहोल्डर्स को एग्जिट प्राइस की कोई पक्की जानकारी नहीं है, ये बाद में तय होगा।

कौन-कौन भाग ले सकता है?

OFS में वही शेयरहोल्डर हिस्सा ले सकेंगे जिनके पास 15 जून 2025 से लगातार पूरी तरह भुगतान किए गए NSE के शेयर हैं। ये नियम रेगुलेटरी गाइडलाइंस के तहत है, जिसमें DRHP फाइल करने से पहले एक तय समय तक शेयर होल्ड करना जरूरी होता है।

इसका मतलब साफ है कि जो लोग अभी अनलिस्टेड मार्केट से NSE के शेयर खरीदने की सोच रहे हैं, वे इस IPO में शामिल नहीं हो पाएंगे। दरअसल, आखिरी समय में एंट्री रोकने के लिए ही एक साल की होल्डिंग की शर्त रखी गई है।

इसके अलावा शेयर पूरी तरह चुकता होने चाहिए और उन पर कोई प्लेज, लियन या किसी भी तरह की कानूनी या आर्थिक पाबंदी नहीं होनी चाहिए। अगर ऐसा कोई बंधन है, तो उन शेयरों को OFS में शामिल नहीं किया जा सकेगा।

EOI जमा करने की आखिरी तारीख 27 अप्रैल

जो शेयरहोल्डर इस IPO के लिए योग्य हैं, उन्हें अपना एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट यानी EOI 27 अप्रैल 2026 को शाम 5 बजे तक जमा करना होगा। यह आखिरी समय है, इसके बाद मौका नहीं मिलेगा। EOI जमा होने के बाद NSE उनकी डिटेल्स को चेक करेगा और तय करेगा कि कौन लोग इसमें हिस्सा लेने के लिए सही हैं। शेयरहोल्डर्स की संख्या बड़ी और अलग-अलग तरह की है, इसलिए ये जांच जरूरी है।

NSE पहले ही योग्य शेयरहोल्डर्स को EOI फॉर्म और जरूरी डॉक्यूमेंट्स भेज चुका है, यानी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जो लोग EOI भरेंगे, वे अपनी हिस्सेदारी पूरी या कुछ हिस्सा बेच सकते हैं। हालांकि एक जरूरी बात ये है कि जो शेयरहोल्डर OFS में हिस्सा लेंगे, वे IPO में निवेशक के तौर पर शेयर नहीं खरीद पाएंगे।

20 मर्चेंट बैंकर और लॉक-इन का जोखिम

NSE ने इस IPO के लिए 20 मर्चेंट बैंकर लगाए हैं, जो भारत में अब तक किसी भी IPO के लिए सबसे ज्यादा माने जा रहे हैं। इसके अलावा कई लीगल एडवाइजर और दूसरे इंटरमीडियरी भी इस प्रक्रिया में जुड़े हुए हैं।

हालांकि शेयरहोल्डर्स के लिए कुछ जोखिम भी हैं। अगर OFS में दिए गए शेयर पूरी तरह नहीं बिकते, तो जो हिस्सा बच जाएगा उस पर लिस्टिंग के बाद छह महीने का लॉक-इन लागू होगा। यानी निवेशक तुरंत बाहर नहीं निकल पाएंगे और इस दौरान बाजार के उतार-चढ़ाव का असर झेलना पड़ सकता है।

इसी तरह, जो प्री-IPO शेयर OFS में नहीं बेचे जाएंगे, उन पर भी एलॉटमेंट की तारीख से छह महीने का लॉक-इन रहेगा। इससे मौजूदा शेयरहोल्डर्स के लिए कुछ समय तक पैसे निकालना आसान नहीं होगा। ऐसे में शेयरहोल्डर्स के लिए जरूरी है कि वे EOI की डेडलाइन का ध्यान रखें और नियमों को अच्छी तरह समझ लें, ताकि कोई मौका हाथ से न निकल जाए।

Spread the love