अमृतसर
अमेरिका के सिएटल में रहने वाली 69 साल की रूपिंदर कौर लंबे समय से अकेली थीं और अपने जीवन में प्यार की तलाश कर रही थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात इंटरनेट के जरिए चरणजीत सिंह ग्रेवाल नाम के एक व्यक्ति से हुई, जिसने उनसे शादी करने का वादा किया।
चरणजीत ने खुद को अमीर और अच्छा इंसान बताया, जिससे रूपिंदर कौर उस पर भरोसा कर बैठीं और शादी के लिए भारत आ गईं, लेकिन भारत पहुंचने के बाद कहानी बदल गई।
एयरपोर्ट पर चरणजीत नहीं आया। उसकी जगह उसके दो साथी सुखजीत सिंह ग्रेवाल और मनवीर सिंह ग्रेवाल उन्हें अपने साथ ले गए। उन्होंने कहा कि दूल्हा बाद में आएगा और तब तक वे उनका ख्याल रखेंगे।
उन्होंने रूपिंदर कौर को “मां” कहकर भरोसा दिलाया, लेकिन असल में वे उन्हें ठग रहे थे। उन्होंने डराया कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है और केस सुलझाने के नाम पर उनसे करीब 40 लाख रुपये और 40 तोला सोना ले लिया।
कुछ दिनों बाद, 12-13 जुलाई की रात, इन लोगों ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। फिर सबूत मिटाने के लिए उनके शव के टुकड़े किए, जलाया और नाले में फेंक दिया।
इस पूरे मामले का खुलासा उनकी बड़ी बहन कमलजीत कौर ने किया। उन्हें शक हुआ जब उनकी बहन का फोन बंद हो गया। उन्होंने सारे चैट और सबूत इकट्ठा कर पुलिस को दिए।
पुलिस ने जांच के बाद एक आरोपी सुखजीत को गिरफ्तार कर लिया, जबकि मुख्य आरोपी चरणजीत अभी फरार है।
अब इस केस में डीएनए रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह साबित होगा कि जो अवशेष मिले हैं, वे रूपिंदर कौर के ही हैं। उनकी बहन आज भी न्याय का इंतजार कर रही हैं।

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