February 26, 2026

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3-नैनोमीटर चिप : भारत के लिए क्यों है अहम और क्या कुछ बदलेगा?

उड़ान न्यूज डेस्क। शिक्षा और उद्योग जगत को यह राहत देने वाली खबर है कि, उच्च तकनीक वाले छोटे चिप यानी 3-नैनोमीटर चिप 2032 तक भारत में ही बनने लगेंगे। इसका उपयोग अत्याधुनिक स्मार्टफोन और लेटेस्ट तकनीक के कम्प्यूटर जैसे अन्य उत्पादों में होता है। दरअसल, सरकार का प्रमुख लक्ष्य देश के पूरे सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षेत्र समग्र और व्यापक रूप से विकसित करने की ओर है। इसे ध्यान में रखते हुए ही 3-नैनोमीटर चिप पर तेजी से काम किया जा रहा है। सरकार चिप की छह श्रेणियों कम्प्यूटर, रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ), नेटवर्किंग, ऊर्जा, सेंसर और मेमोरी पर प्रमुखता से काम करेगी। इससे देश की कंपनियों को प्रौद्योगिकी उत्पादों के विकास पर नियंत्रण मिल सकेगा।
यहां मिलेगा खास फायदा
सरकार का प्रयास है कि, 3-नैनोमीटर चिप की मदद से कम्प्यूटर, आरएफ, नेटवर्किंग, ऊर्जा, सेंसर और मेमोरी इन छह प्रमुख श्रेणियों में शिक्षा जगत और उद्योग को नए विचार, नई सोच और नए समाधान के लिए प्रोत्साहित करेंगे। सरकार का लक्ष्य 3032 तक भारत में ही पूर्ण रूप से चिप निर्माण करने का है, लेकिन 2029 तक देश में ऐसे चिप के डिजाइन और विनिर्माण की बड़ी क्षमता विकसित हो जाएगी। देश में लगभग हर क्षेत्र को इन छह प्रकार के चिप के किसी न किसी संयोजन की आवश्यकता होती है, जिसका फायदा इन क्षेत्रों को मिलेगा।
शिक्षा और उद्योग जगत को खास फायदा
सरकार की मंशा है कि शिक्षा जगत और उद्योग मिलकर नए विचार, नई तकनीक और इनोवेटिव समाधान सामने लेकर आएं। इन छह प्रमुख चिप कैटेगरी के जरिए पूरा सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम समग्र और मजबूत रूप से विकसित किया जा सकेगा। हर सेक्टर को इन चिप्स के किसी न किसी कॉम्बिनेशन की जरूरत होती है, जिससे इनके लिए घरेलू मांग भी लगातार बनी रहेगी।
भारत के लिए इसलिए है अहम
3-नैनोमीटर चिप तकनीक कम बिजली खपत, ज्यादा प्रोसेसिंग पावर और छोटे आकार के लिए जानी जाती है। इस स्तर तक पहुंचने से भारत न सिर्फ आयात पर निर्भरता कम कर सकेगा, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भी अहम भूमिका निभा सकेगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम, ऑटोमोबाइल और डिफेंस जैसे सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा।

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