April 27, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

बागेश्वर धाम की सभा में महाभारत कलाकारों के बयान, हिंदू राष्ट्र पर जोर

 

प्रयागराज के बागेश्वर धाम में धीरेंद्र शास्त्री की आयोजित कथा और सभा इन दिनों चर्चाओं में बनी हुई है. हाल ही में वो छत्रपति शिवाजी महाराज पर दिए बयान से सुर्खियों में आए थे, लेकिन अब उनकी सभा में बीआर चोपड़ा की महाभारत की कास्ट पहुंची. शो में युधिष्ठिर, दुर्योंधन, और श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले एक्टर्स ने मंच से हिंदू धर्म की रक्षा और देश के हिंदू राष्ट्र बनाने पर जोर दिया. उनके फायर बोल ने सभी के कान खड़े कर दिए हैं. आइये जानते हैं इन्होंने क्या कुछ कहा.

पुनीत ने दी लव-जिहाद से बचने की सलाह
बागेश्वर धाम की सभा में पहुंचे 'दुर्योधन' का किरदार निभाने वाले पुनीत इस्सर ने कहा कि- ऐसी सभाओं को देखकर लगता है कि हमारा हिंदू जागृत है और हिंदू राष्ट्र जरूर बनेगा. मैं अपनी माताओं-बहनों और भाईयों से ये जरूर कहना चाहूंगा कि अपने बच्चों को धर्म के प्रति अवगत जरूर कराएं. आसपास के लोगों से सतर्क रहें. जिस तरह से ये जबरदस्ती के धर्म परिवर्तन हो रहे हैं, हमारी बहू-बेटियों को बहलाया जा रहा है, उनका धर्म परिवर्तन किया जा रहा है. उनसे बचकर रहे, और किसी भी कीमत पर ये नहीं होना चाहिए.

इसी के साथ पुनीत ने आगे कहा कि- मैं समझता हूं कि शास्त्रों के साथ-साथ शस्त्र विद्या भी आवश्यक होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने सभी के व्यायाम पर भी जोर दिया.

गजेंद्र की दहाड़- राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं
बाबा बागेश्वर की इस कथा का हिस्सा युधिष्ठिर यानी गजेंद्र चौहान भी बने. उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि- महाभारत देखी सबने लेकिन किया हमने. हमने उन पापियों का सत्यानाश किया जो धर्म के खिलाफ थे. अपनी बात को आगे समझाते हुए गजेंद्र ने कहा कि- धर्म के विरोध में काम करने वालों का सत्यानाश होना ही चाहिए. इस देश को अगर हिंदू राष्ट्र बनाना है तो महाभारत के इस एक लाइन को याद कर लीजिए- कोई भी पुत्र, कोई भी पिता, कोई भी परिवार-परंपरा, कोई भी प्रतिज्ञा राष्ट्र से बड़ी नहीं हो सकती. जहां राष्ट्र की बात आती है सबकुछ समर्पण है.

नितीश बोले- हिंदू धर्म सर्वोपरि
इसी के साथ श्रीकृष्ण का किरदार निभाने वाले नितीश भारद्वाज ने भी हिंदू राष्ट्र बनाने की बात पर जोर देते हुए कहा कि- जब से आया हूं सबने कहा महाभारत बहुत देखी. मित्रों, महाभारत आज भी चल ही रही है. लेकिन अलग तरह की चल रही है. धर्म की रक्षा की आवश्यकता फिर से पड़ गई है. ये कलियुग है. जब द्वापर में धर्म की रक्षा की जरूरत पड़ी, तो कलियुग में तो पड़नी ही है.

नितीश ने आगे भगवद् गीता का श्लोक याद दिलाते हुए कहा कि- इस समय जब धर्म रक्षा और विजय की आस लेकर तुम्हारे सामने खड़ा है, ऐसे समय में निराशा के भाव को अपने मन में आने नहीं देना है. आज परिस्थितियां वैसी ही हैं. भारत और विदेशों में भी. तरह-तरह की शक्तियां काम कर रही हैं. हिंदू धर्म पर आक्रमण हो रहा है. जो आदि-अनादि काल से चला आ रहा है वो केवल एक धर्म है- हिंदू धर्म. इस संस्कृति का रहना बहुत आवश्यक है. अगर हमारा व्यवहार सनातन वैदिक हिंदू नहीं होता तो ये दूसरे धर्म यहां आकर नहीं पनपते. न ही आज इनकी हिंदू धर्म के ऊपर टीका-टिप्पणी करने की हिम्मत होती.

नितीश ने आगे भगवद् गीता का एक उपदेश कहते हुए समझाया कि हिंदू धर्म बांटने का काम नहीं करता है. इसलिए हमारे बीच सिर्फ प्रेम होना चाहिए. जो हमसे प्रेम करेगा हम उन्हीं से करेंगे, वरना हमें छत्रपति शिवाजी महाराज भी बनना आता है. क्योंकि धर्म की रक्षा हमारा कर्तव्य है.

 

 

Spread the love