उड़ान डेस्क। वैसे तो कैंसर का नाम सुनते ही हर कोई दहशत से भर जाता है, लेकिन थायरॉयड कैंसर के मामले में एक चौंकाने वाला और चिंताजनक ट्रेंड चिकित्सा विशेषज्ञों के सामने आया है। हालिया वैज्ञानिक अध्ययनों और विशेषज्ञों के विश्लेषण से पता चला है कि थायरॉयड कैंसर महिलाओं को अपना सबसे आसान शिकार बना रहा है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस बीमारी का जोखिम लगभग तीन गुना अधिक पाया गया है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में एक गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।
क्यों निशाने पर हैं महिलाएं ?
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस असंतुलन के पीछे महिलाओं के शरीर में होने वाले जटिल हार्मोनल बदलाव सबसे मुख्य कारण हैं। विशेष रूप से ‘एस्ट्रोजन’ हार्मोन थायरॉयड कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि को उत्तेजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संवेदनशील पड़ाव: किशोरावस्था से लेकर गर्भावस्था और फिर मेनोपॉज तक, महिलाओं का शरीर निरंतर हार्मोनल उतार-चढ़ाव से गुजरता है। ये बदलाव थायरॉयड कोशिकाओं को असामान्य परिवर्तनों के प्रति अधिक संवेदनशील बना देते हैं।
उम्र का अंतर: जहां महिलाओं में यह खतरा 40 से 50 वर्ष की आयु के बीच चरम पर होता है, वहीं पुरुषों में यह बीमारी आमतौर पर 10 से 20 साल देरी से दस्तक देती है।
सूजन और ऑटोइम्यून कारण: महिलाओं में ऑटोइम्यून थायरॉयड बीमारियों की अधिकता और ग्रंथि में लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन अंततः कैंसर का रूप ले सकती है।
पुरुषों के लिए चेतावनी: कम खतरा, अधिक गंभीरता यद्यपि पुरुषों में थायरॉयड कैंसर के मामले कम देखे जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि पुरुषों में यह बीमारी ‘देर आए, दुरूस्त आए’ की तर्ज पर अधिक घातक साबित होती है। पुरुषों में इसकी पहचान अक्सर तब होती है जब कैंसर काफी एडवांस स्टेज पर पहुंच चुका होता है, जिससे इलाज की प्रक्रिया और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
पहचान के संकेत: थायरॉयड कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती इसके ‘मौन लक्षण’ हैं। गर्दन के सामने बिना दर्द वाली गांठ या सूजन इसका सबसे प्राथमिक संकेत है। आवाज में लगातार भारीपन या बदलाव महसूस होना। भोजन निगलने में कठिनाई और गर्दन में दबाव। बिना किसी संक्रमण के लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी इत्यादि।
आधुनिक उपचार : राहत की बात यह है कि शुरुआती स्टेज में पकड़ में आने पर यह सबसे सफल इलाज योग्य कैंसरों में से एक है। सर्जरी के माध्यम से ग्रंथि को निकालना और रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी जैसी तकनीकें मरीजों को एक स्वस्थ जीवन की वापसी में मदद करती हैं।

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