जयपुर
राजस्थान के नीमकाथाना जिले के मोकलवास में गुरुवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब झरिंड़ा स्थित एक क्रेशर खदान में भीषण भूस्खलन के कारण पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर नीचे आ गिरा. इस हादसे में 4 मजदूर भारी पत्थरों और मशीनों के नीचे दब गए. राहत की बात यह रही कि 3 मजदूरों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन 1 मजदूर अब भी करीब 12 घंटों से खान के भीतर फंसा हुआ है. शुक्रवार सुबह होते ही प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन में पूरी ताकत झोंक दी है.
अंधेरे और मौसम ने बढ़ाई मुश्किलें
मलबे के नीचे दबे चौथे मजदूर दयालचंद का रात भर पता नहीं चल सका. रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती रात का घना अंधेरा और खराब मौसम रहा. संसाधनों की कमी और दोबारा भूस्खलन के खतरे को देखते हुए बचाव कार्य को बीच में रोकना पड़ा, जिसके कारण दयालचंद पूरी रात मलबे के नीचे ही फंसा रहा.
प्रतापगढ़ का निवासी है फंसा हुआ मजदूर
मलबे में फंसे मजदूर की पहचान प्रतापगढ़ जिले के निवासी के रूप में हुई है. दयालचंद खदान में मशीनरी संचालन का कार्य कर रहा था, तभी अचानक गिरी चट्टानों ने उसे और मशीनों को अपनी चपेट में ले लिया. परिजनों और स्थानीय प्रशासन की सांसें अब शुक्रवार सुबह शुरू हुए इस अंतिम दौर के रेस्क्यू पर टिकी हैं.
NDRF की टीम मौके पर पहुंची
हादसे की गंभीरता को देखते हुए नीमकाथाना एडीएम (ADM) भागीरथमल साख और एएसपी (ASP) लोकेश मीणा भारी पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर डटे हुए हैं. रेस्क्यू को गति देने के लिए NDRF की टीम भी झरिंड़ा गांव पहुंच चुकी है. आधुनिक कटर और भारी मशीनों की मदद से विशालकाय पत्थरों को हटाने का काम अब युद्धस्तर पर किया जा रहा है.

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