धरसींवा
धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों को अब जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए रायपुर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। छत्तीसगढ़ शासन ने धरसींवा ब्लॉक मुख्यालय में नवीन उप पंजीयक (उप रजिस्ट्रार) कार्यालय की स्थापना को मंजूरी देते हुए जून माह से इसके संचालन की उम्मीद।
क्षेत्रीय विधायक अनुज शर्मा के प्रयासों से शुरू होने जा रहे इस कार्यालय से क्षेत्र के 60 गांवों के हजारों ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही रजिस्ट्री और पंजीयन संबंधी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
विधायक बोले चुनाव में किये वादे पुरे किये जा रहे हैं
विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि धरसींवा मुख्यालय में उप पंजीयक कार्यालय की शुरुआत क्षेत्र के विकास और आम जनता की सुविधा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादे के अनुरूप अब लोगों को छोटे-छोटे शासकीय कार्यों के लिए राजधानी रायपुर नहीं जाना पड़ेगा।
समय और पैसे दोनों की होगी बचत
अब तक क्षेत्र के ग्रामीणों को जमीन-मकान की रजिस्ट्री सहित अन्य पंजीयन कार्यों के लिए रायपुर जाना पड़ता था। इससे उनका पूरा दिन खर्च होने के साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ता था। नए कार्यालय के शुरू होने से लोगों को स्थानीय स्तर पर ही सुविधाएं मिलेंगी, जिससे समय, पैसा और श्रम तीनों की बचत होगी।
विधायक ने बताया कि इस मांग को शासन स्तर पर लगातार उठाया गया था, जिसके बाद इसे स्वीकृति मिली। उन्होंने मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
इन 60 गांवों को मिलेगा लाभ
नए उप पंजीयक कार्यालय के अंतर्गत धरसींवा क्षेत्र के 60 गांवों को शामिल किया गया है। इनमें कुरा, भेरवा, पंडरभट्टा, मुरा, भैंसमुड़ा, बरतनारा, अकोली, मनोहरा, देवरी, मेहरशखा, कुकेरा, कुथरैल, मौहागांव, मलौद, सिलयारी, कुरूद, पथरी, तरेसर, मंगसा, पवनी, निलजा, तर्रा, बरबंदा, नेउरडीह, नगरगांव, टोर, गिधौरी, गोढ़ी, मोंहदी, रैता, धरसींवा, तिवरैया, परसतराई, सिलतरा, मुनरेठी, टाडा, मांढर, गिरौद, सौंढ़रा, बहेसर, चिखली, कुम्हारी, सारागांव, दौंदेकला, दौंदेखुर्द, जरौदा, छपोरा, भुरकोनी, टेकारी, चरौदा, बाना, कपसदा, धनेली, सांकरा, निमोरा, कन्हेरा, लालपुर, मटिया, कारा और बोरझरा शामिल हैं।
ग्रामीणों में खुशी का माहौल
कार्यालय की अधिसूचना जारी होने के बाद क्षेत्र के किसानों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में खुशी का माहौल है। लंबे समय से लंबित इस मांग के पूरा होने को लोग बड़ी राहत के रूप में देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे प्रशासनिक सेवाएं गांवों के और करीब पहुंचेंगी तथा राजस्व संबंधी कार्यों में तेजी आएगी।

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