भारतीय रेलवे ने बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने ‘जन विश्वास अधिनियम, 2026’ के तहत पेनल्टी-आधारित नियम लागू करते हुए बिना टिकट यात्रा करने पर कम से कम जुर्माना ₹250 से बढ़ाकर 500 रुपए करने का प्रस्ताव दिया है. रेलवे से जुड़े कई अपराधों के लिए भी जुर्माने की राशि बढ़ाई जाएगी. रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को जानकारी दी है कि इस कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है और ‘रेलवे अधिनियम, 1989’ में किए गए संशोधनों को एक अलग नोटिफिकेशन के जरिए लागू किया जाएगा.
जानिए, क्या हैं नए नियम?
1- मुख्य बदलावों में से एक बिना टिकट यात्रा से जुड़ा है. संशोधित धारा 137 के तहत, बिना वैध टिकट यात्रा करने वाले या पहले इस्तेमाल किए जा चुके टिकट का दोबारा इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को ज्यादा जुर्माना देना होगा. पहले यह जुर्माना 250 रुपये था जो अब कम से कम 500 होगा. भुगतान न करने पर मामला सक्षम अदालत में भेजा जा सकता है. नए नियम 1 जुलाई से लागू किए जाएंगे.
2- संशोधनों में किसी और व्यक्ति के टिकट पर यात्रा करने पर लगने वाले जुर्माने में भी बदलाव किया गया है. ऐसे टिकट जब्त कर लिए जाएंगे और यात्री को किराया और अतिरिक्त शुल्क देना होगा जिसमें कम से कम 500 रुपये का फाइन होगा.
3- ट्रेनों और रेलवे परिसर में बिना इजाजत सामान बेचने या भीख मांगने पर 2000 रुपये का जुर्माना लगेगा. बार-बार ऐसा करने वालों को एक साल तक की जेल हो सकती है.
4- जो यात्री परेशानी पैदा करते हैं, गाली-गलौज या अश्लील भाषा का इस्तेमाल करते हैं, रेलवे की सुविधाओं में रुकावट डालते हैं या दूसरे यात्रियों को परेशान करते हैं, उन पर 1,000 रुपये का जुर्माना लग सकता है. नशे की हालत में हंगामा करने वालों को ट्रेन और स्टेशनों से हटाया जा सकता है और उन पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
5- प्रस्तावित बदलावों में महिलाओं के लिए आरक्षित कोच, सीट या बर्थ पर पाए जाने वाले पुरुषों के लिए 2,500 रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान है. रेलवे कर्मचारियों को ऐसे यात्रियों को हटाने का अधिकार होगा.
6- ट्रेनों में प्रतिबंधित या खतरनाक सामान ले जाने पर कम से कम 10,000 रुपये का जुर्माना लग सकता है. यात्री क्षेत्रों में बिना इजाजत घुसने पर 500 रुपये का जुर्माना लगेगा.
बता दें कि जन विश्वास एक्ट में जुर्माने की रकम में समय-समय पर बदलाव का भी प्रावधान है. इसके तहत आने वाले कानूनों में जुर्माना हर तीन साल में 10% बढ़ जाएगा, जब तक कि बदलाव का कोई अलग तरीका न तय किया गया हो. कानून के मुताबिक, इसका मकसद छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना, नियमों का पालन बेहतर बनाना और भरोसे पर आधारित गवर्नेंस को बढ़ावा देना है. आर्थिक जुर्माने के जरिए नियमों को तेजी से लागू करने की कोशिश की जाएगी.

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