June 24, 2026

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खरीफ फसल पर ‘संकट के बादल’ : कम बारिश से प्रभावित होंगे 315 जिले, 111 जिलों में सूखे की संभावना

दक्षिण पश्चिम मानसून के मौसम में लगभग एक महीना बीत चुका है। बारिश की कमी 43 प्रतिशत को छू गई है। केंद्र सरकार ने देश भर के 315 जिलों की पहचान की है, जो इस वर्ष कम मानसून से प्रभावित हो सकते हैं। इनमें से 111 जिलों को अति संवेदनशील के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जहां सिंचाई का कवरेज 25 प्रतिशत से कम है।

शेष जिलों में से 76 को मध्यम संवेदनशील (25-50 प्रतिशत सिंचाई कवरेज) और 128 को कम संवेदनशील (50 प्रतिशत से अधिक सिंचाई कवरेज) की श्रेणी में रखा गया है। अति संवेदनशील 111 जिलों में से अधिकांश महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में हैं। इनमें से लगभग 22 महाराष्ट्र के जिले हैं। सबसे गंभीर रूप से प्रभावित जिलों को वर्गीकृत करने का निर्णय ऐसे समय में आया है जब 1 से 23 जून तक समग्र वर्षा की कमी 43 प्रतिशत को छू गई है। हालांकि बारिश में सुधार के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य के कृषि मंत्रियों, अति संवेदनशील जिलों के जिलाधिकारियों और मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘ मौसम विभाग के अनुसार 2 जुलाई तक कमजोर मानसून की स्थिति बने रहने की संभावना है, जो खरीफ की फसल, विशेष रूप से धान और मक्का जैसी अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों को प्रभावित कर सकती है।’

उन्होंने कहा कि पहचाने गए 111 अति संवेदनशील जिलों में विशेष अभियान चलाकर सुनिश्चित किया जाएगा कि फसल बीमा कवरेज, आसान ऋण उपलब्धता, पुनः रोपण के लिए पर्याप्त बीज, उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग और उर्वरक की उपलब्धता हो सके।

खरीफ की फसलों की 22 जून तक बोआई कुल रकबे के 10 प्रतिशत से कम रही है। इस दौरान बोआई का रकबा पिछले साल के 117.9 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस साल मामूली बढ़कर 119.9 लाख हेक्टेयर रहा है। सोयाबीन को छोड़कर अधिकांश फसलों का रकबा अधिक है।

केंद्र ने 315 जिलों को किया चिह्नित

मंत्रालय ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 315 जिलों को चिह्नित किया है, जहां सामान्य से कम बारिश हो सकती है।

मंत्रालय ने राज्य-वार आकस्मिक योजनाएं तैयार की हैं। किसानों को कम वर्षा की स्थिति के अनुकूल वैकल्पिक फसलों की बोआई की सलाह दी गई है। राज्यों को कम पानी की आवश्यकता वाले दलहन, तिलहन और मोटे अनाज को बढ़ावा देने और एक ही फसल पर निर्भरता के बजाय छोटी अवधि और जलवायु के प्रति लचीले बीजों की किस्म को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं।

वैकल्पिक फसलों के सुझाव देने की जरूरत

मंत्री ने कहा, ‘बारिश कम हुई है। हमें किसानों को वैकल्पिक फसलों के सुझाव देने की जरूरत है। हम खेतों को खाली नहीं छोड़ सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि इस सीजन के लिए बीज और खाद की पर्याप्त उपलब्धता है और जलाशयों का स्तर भी पिछले साल से बेहतर है। राज्यों से जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने और ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार ऐंड आजीविका मिशन ग्रामीण’ (वीबी-जी राम जी) कार्यक्रम के तहत तालाबों, धाराओं, फार्म तालाबों और चेक डैम की सफाई, जल संरक्षण और सिंचाई की जरूरतों के लिए काम करने को कहा गया है।

मंत्रालय ने चिह्नित राज्यों में फसल बीमा योजनाओं और किसान क्रेडिट कार्ड के तहत व्यापक नामांकन का आह्वान किया है। देश के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों को किसानों तक पहुंच बढ़ाने के लिए कहा गया है, जिसमें एसएमएस, व्हाट्सऐप, कॉल सेंटर और अन्य माध्यमों से समय पर सलाह दिया जाना शामिल है।

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