July 3, 2026

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Delhi : बिजली कंपनियों को देना होगा ₹38,500 करोड़ का हिसाब, CAG ऑडिट के आदेश

दिल्ली सरकार ने लगभग ₹38,500 करोड़ के रेगुलेटरी एसेट्स (RA) को लेकर चिंताओं के बीच बिजली वितरण कंपनियों के ऑडिट के लिए CAG को निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि बिजली कंपनियों के पास वर्षों से जमा लगभग ₹38,500 करोड़ के रेगुलेटरी एसेट्स की स्थिति और उसके औचित्य की जांच जरूरी है।

गौरतलब है कि जून में, दिल्ली हाई कोर्ट ने बिजली वितरण कंपनियों के CAG ऑडिट के लिए दिल्ली सरकार के प्रस्ताव में दखल देने से इनकार कर दिया था।

उपराज्यपाल से हरी झंडी मिलने के बाद अब तीन महीने के अंदर इस व्यापक ऑडिट प्रक्रिया को पूरा करने का टारगेट तय किया गया है। दिल्ली के मंत्रिमंडल ने 20 जून 2025 को इस सख्त ऑडिट की सिफारिश की थी, जिसे अब उपराज्यपाल ने सार्वजनिक हित में अपनी अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है।

क्या हैं रेगुलेटरी एसेट्स?
रेगुलेटरी एसेट्स वह राशि होती है जिसे बिजली कंपनियां तत्काल बिजली दरों में शामिल नहीं कर पातीं और बाद में उपभोक्ताओं से वसूली के लिए बैलेंस शीट में दर्ज करती हैं। समय के साथ यह राशि बढ़ती जाती है और अंततः इसका बोझ बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। दिल्ली में ऐसी देनदारियों का आकार अब करीब ₹38,500 करोड़ तक पहुंच चुका है।

सरकार ने क्यों लिया ऑडिट का फैसला?
दिल्ली सरकार का मानना है कि इतनी बड़ी राशि के जमा होने के पीछे की परिस्थितियों और वित्तीय प्रक्रियाओं की जांच जरूरी है। सरकार यह समझना चाहती है कि क्या ये रेगुलेटरी एसेट्स उचित तरीके से बनाए गए हैं और क्या इनके जरिए भविष्य में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाला जा सकता है।

किन कंपनियों की होगी जांच?
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑडिट का दायरा दिल्ली की प्रमुख निजी बिजली वितरण कंपनियों तक पहुंच सकता है। इन कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड, लागत वसूली, रेगुलेटरी एसेट्स और उपभोक्ताओं से जुड़े शुल्कों की समीक्षा की जाएगी।

बिजली उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऑडिट में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता या अतिरिक्त देनदारी सामने आती है तो भविष्य में बिजली टैरिफ निर्धारण पर इसका असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि जांच में पारदर्शिता बढ़ती है तो उपभोक्ताओं को राहत भी मिल सकती है। फिलहाल सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली राशि पूरी तरह उचित और सत्यापित हो।

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