September 5, 2026

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टाटा केमिकल्स ने संभाल रखी थी केन्या के काजियाडो शहर की इकनॉमी, बंद होते हुए परेशान हो रहे लोग

नई दिल्ली. टाटा समूह सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य देशों में अपने कारोबार से आम आदमी को रोजगार और जरूरत की चीजें मुहैया कराती है. ऐसा ही एक देश है केन्या के जिसके शहर काजियाडो में टाटा समूह की कंपनी टाटा केमिकल्स मगाडी काफी बड़ा कारोबार कर रही थी, लेकिन केन्या की सरकार ने उसके कामकाज पर रोक लगा दी. कंपनी के बंद होते ही शहर की इकनॉमी भी घुटनों पर आ गई और वहां के लोग जरूरी चीजों के लिए भी मोहताज होने लगे. टाटा ने केन्या के इस शहर की पोल भी खोलकर दी कि किस तरह एक शहर के लोग एक ही कॉरपोरेट कंपनी पर निर्भर थे.

CNN-News18 ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि केन्या सरकार द्वारा ‘टाटा केमिकल्स मगाडी’ के कामकाज को अनिश्चित काल के लिए रोके जाने से काजियाडो शहर में मानवीय और सामाजिक-आर्थिक संकट पैदा हो गया है. इससे यह बात खुलकर सामने आ गई है कि स्थानीय समुदाय की नौकरियों, पैसे के लेन-देन और पानी जैसी बुनियादी नागरिक सुविधाओं के लिए यह शहर किस हद तक एक ही कॉर्पोरेट कंपनी पर निर्भर है. विश्लेषण रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे इस कंपनी पर हुई कार्रवाई ने मगाडी में बुनियादी ढांचे की कमी को उजागर कर दिया है, जहां कंपनी का कामकाज स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जरूरी सेवाओं के साथ गहराई से जुड़ा था.

इलाज पर भी गंभीर असर
एक स्थानीय डॉक्टर ने बताया कि इसका असर इलाज कराने आने वाले लोगों की संख्या पर भी साफ दिख रहा है. अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या कम हो गई है. भले ही यह अस्पताल नॉन-प्रॉफिट (बिना मुनाफे वाला) है, फिर भी हमारे मरीज आम तौर पर थोड़ी-बहुत फीस देते हैं. लेकिन, कंपनी का कामकाज बंद होने की वजह से आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई है कि पैसे का लेनदेन बहुत कम हो गया है. डॉक्टर ने बताया कि इलाके के लगभग 95% लोग कंपनी से जुड़ी आमदनी पर निर्भर थे. इनमें वे कॉन्ट्रैक्टर भी शामिल थे जिन्हें टाटा केमिकल्स से काम मिलता था और जो बदले में स्थानीय स्तर पर दूसरों के लिए आमदनी का जरिया बनते थे.

लोग अस्पताल ही नहीं आ रहे
डॉक्टर ने बताया कि दुर्भाग्य से अभी पैसे का लेनदेन कम हो गया है और देखा जा रहा है कि जब तक कोई बहुत ज्यादा बीमार न हो, लोग अस्पताल नहीं आ रहे हैं. अस्पताल आने वाले लोगों की संख्या में कमी एक बड़ी समस्या की ओर इशारा करती है. जिन लोगों की नियमित आमदनी बंद हो गई है, वे अब बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च उठाने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं.

पानी की सप्लाई पर भी असर
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में पानी की सप्लाई पर भी गंभीर असर पड़ा है. फिलहाल यह सबसे जरूरी और तत्काल हल करने वाली समस्या बन गई है. कंपनी का कामकाज रुकने से पानी की सप्लाई जैसी जरूरी नागरिक सुविधा बाधित हो गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जो सिस्टम पहले इलाके में पानी पहुंचाने में मदद करते थे, वे अब ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, जिससे लोगों को इमरजेंसी पानी के ट्रकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. महिलाओं और बच्चों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा है.

पानी की कमी से सब परेशान
शहर के लोगों का कहना है कि हमें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि मगाडी से जो थोड़ी-बहुत पानी की मदद मिलती थी, वह अब नहीं मिल रही है. परिवारों को अब GSU ट्रक पर निर्भर रहना पड़ता है. 5,000 या 10,000 लीटर क्षमता वाले इमरजेंसी टैंक अब लोगों को बहुत कम मात्रा में पानी दे रहे हैं. ज्यादातर टैंक अब खाली दिख रहे हैं और लोगों की मदद के लिए थोड़ा-बहुत पानी दिया जाता है.

16 किलोमीटर दूर से लाते हैं पानी
शहर में समस्या इस कदर बढ़ गई है कि पानी लाने के लिए लोगों को 16 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है और 500 शिलिंग खर्च करने पड़ते हैं. जिन लोगों के पास अपनी गाड़ी है, उनके लिए पानी का इंतजाम करना रोज का एक महंगा काम बन गया है. एक निवासी ने बताया कि अब वह पानी खरीदने के लिए अपनी मोटरसाइकिल से लगभग 16 किलोमीटर दूर मगाडी जाते हैं और इस सफर में ईंधन पर 500 केन्याई शिलिंग तक खर्च करते हैं, जो भारतीय रुपये में करीब 360 रुपये होता है. हालांकि, दूसरे लोगों के पास ऐसे विक्ल्प नहीं होते और वे इमरजेंसी ट्रकों पर निर्भर रहते हैं.

एक बाल्टी पानी के लिए 11 बजे तक इंतजार
एक निवासी ने बताया कि हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि एक या दो बाल्टी पानी के लिए महिलाएं रात 11 बजे तक इंतजार करती हैं. एक और निवासी ने बताया कि कंपनी के बंद होने से पानी की उस टंकी पर भी असर पड़ा है जो पहले कंपनी की मदद पर निर्भर थी. पानी के मामले में कंपनी के बंद होने के बाद से हमें बहुत मुश्किल हो रही है, क्योंकि हमारे पास जो एक टंकी है, कंपनी ने उसे बंद कर दिया है. कंपनी के बंद होने के बाद से ईंधन नहीं मिल रहा है.

सरकार से अपील, कंपनी का शुरू कराएं काम
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब पूरी जगह पानी के लिए सिर्फ एक ही टैंकर पर निर्भर है, जो स्कूलों में भी पानी पहुंचाता है. जब पानी का ट्रक आता है तो हर व्यक्ति को सिर्फ एक या दो बाल्टी पानी ही मिल पाता है. लोगों ने केन्या सरकार से अपील की है कि जब तक कंपनी का कामकाज फिर से शुरू नहीं हो जाता, तब तक पानी के और ट्रक उपलब्ध कराए जाएं. इस संकट ने यह दिखा दिया है कि उस इलाके में बुनियादी सेवाएं स्वतंत्र सार्वजनिक सिस्टम के बजाय किस हद तक कॉर्पोरेट इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर हो गई हैं. टाटा केमिकल्स मगाडी का कामकाज बंद होने का असर सिर्फ औद्योगिक गतिविधियों के नुकसान तक ही सीमित नहीं रहा है. इसने लोगों की आजीविका को भी प्रभावित किया है.

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