September 6, 2026

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दिल्ली पीजी हादसा : अचानक कैसे ढह गई पांच मंजिला इमारत? सुरक्षा और रख-रखाव को लेकर उठे रहे बड़े सवाल…

नईदिल्ली। दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम इलाके सत्य निकेतन में रविवार को एक हृदयविदारक घटना घटी, जब ‘हॉस्टल डेज’ नामक एक पांच मंजिला पीजी हॉस्टल अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस हादसे ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस का एक प्रमुख छात्र केंद्र है। इमारत के गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास की इमारतों में रहने वाले लोग भूकंप के डर से अपने घरों से बाहर निकल आए। मलबे के ढेर को देखकर स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और अपने हाथों से कंक्रीट की भारी सिल्लियां हटाने की कोशिश की। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 3 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि बचाव दलों ने 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। दिल्ली पुलिस ने सत्य निकेतन इमारत हादसे में मालिक आनंद बंसल के खिलाफ FIR दर्ज की है।

बेसमेंट में निर्माण कार्य और कमजोर नींव का खतरा
हादसे की प्रारंभिक वजह बेसमेंट में चल रहे निर्माण और मरम्मत कार्य को माना जा रहा है और दिल्ली पुलिस में कार्यरत स्थानीय निवासी राजेन छेत्री ने बताया कि इस पीजी में करीब 15 कमरे थे और छात्र हर बेड के लिए लगभग 12000 रुपये किराया दे रहे थे। छेत्री के अनुसार, यहां रहने वाले ज्यादातर छात्र केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने खुलासा किया कि पिछले कुछ समय से बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था, जहां पानी जमा होने की समस्या भी देखी गई थी और राजेन छेत्री, जो पिछले 20 साल से इसी इलाके में रह रहे हैं, ने दावा किया कि इस इमारत की नींव बहुत कमजोर थी। कमजोर नींव के बावजूद बेसमेंट में की जा रही खुदाई या निर्माण ने पूरी संरचना को अस्थिर कर दिया, जिससे यह भीषण हादसा हुआ।

Hostel Days के नाम से चल रही थी इमारत
अधिकारियों के मुताबिक ढही हुई इमारत को Hostel Days के नाम से जाना जाता था. सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक है और यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। स्थानीय निवासी राजेन छेत्री के मुताबिक इमारत में करीब 15 कमरे थे और एक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। यहां रहने वाले कई छात्र आसपास के दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में पढ़ते थे।

चश्मदीद ने बताया बेसमेंट में चल रहा था काम
एक चश्मदीद के मुताबिक सत्य निकेतन की पुरानी PG बिल्डिंग के बेसमेंट में काम चल रहा था और बारिश के बाद वहां पानी भर गया था। उनका दावा है कि इमारत काफी पुरानी थी और उसमें पांच-छह मंजिलें थीं। उन्होंने करीब 30 से 40 छात्रों के रहने की आशंका जताई। हालांकि इमारत गिरने की असली वजह की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

रखरखाव की कमी और अवैध निर्माण पर सवाल
सत्य निकेतन में हुई इस घटना ने इलाके की पुरानी इमारतों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई पुराने घरों को पीजी में बदल दिया गया है और उनके मालिक अब वहां नहीं रहते। वे केवल ऑनलाइन किराया वसूलते हैं और इमारतों के रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं देते। ‘हॉस्टल डेज’ की यह इमारत 20 साल से भी ज्यादा पुरानी थी और पिछले कई वर्षों से इसमें कोई मेंटेनेंस का काम नहीं देखा गया था। निवासियों का दावा है कि सत्य निकेतन में मुश्किल से 30 प्रतिशत मकान मालिक खुद रहते हैं, बाकी सब पीजी के रूप में चल रहे हैं। इलाके में खुले गटर और सीवर की समस्या भी आम है। अब स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि रिहायशी इलाकों में बेसमेंट वाली पांच मंजिला इमारतों के स्ट्रक्चरल वेरिफिकेशन की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि क्या ऐसे निर्माणों की अनुमति दी जानी चाहिए थी।

कैसे ढही सत्य निकेतन की इमारत?

  • दिल्ली पुलिस के मुताबिक हादसे के समय इमारत के बेसमेंट में काम चल रहा था. इमारत में एक बेसमेंट और उसके ऊपर पांच मंजिलें थीं।
  • स्थानीय लोगों और चश्मदीदों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण बेसमेंट में पानी जमा हो गया था।
  • स्थानीय लोगों के मुताबिक इमारत करीब 20 साल पुरानी थी और इसे PG के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
  • कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि इमारत के नीचे के हिस्से और पिलर कमजोर थे, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
  • बेसमेंट का काम, पानी भरना या कमजोर ढांचा-इनमें से हादसे की सही वजह क्या थी, इसका पता तो जांच के बाद ही चल पाएगा।
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