15 फरवरी यानी आज देशभर में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। साल भर में 12 शिवरात्रियां आती हैं, लेकिन महाशिवरात्रि को सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और चारों पहर भगवान शिव का विशेष पूजन करते हैं। आखिर क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि? जानिए इसके पौराणिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में…
- शिव-पार्वती विवाह: मान्यता है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव ने वैराग्य त्याग कर माता पार्वती से विवाह किया था।
- विषपान (नीलकंठ): समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को पीकर शिव ने सृष्टि की रक्षा की थी, जिसकी खुशी में यह उत्सव मनाया जाता है।
- तांडव नृत्य: माना जाता है कि इसी रात्रि को शिव ने सृष्टि, संरक्षण और संहार का ब्रह्मांडीय नृत्य ‘तांडव’ किया था।
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व
- ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन: महाशिवरात्रि की रात ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है कि मानव शरीर में ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर (रीढ़ की हड्डी के माध्यम से) बढ़ती है। इसलिए इस रात जागते रहना और रीढ़ सीधी रखना लाभदायक माना जाता है।
- आध्यात्मिक जागृति: यह रात आत्म-चिंतन, ध्यान और आंतरिक शांति प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम है।

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