March 26, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

महिला अपराधों की विवेचना में सुधार के लिए एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

भोपाल 

महिला सुरक्षा शाखा पुलिस मुख्यालय द्वारा आज नवीन पुलिस मुख्यालय स्थित सभागार में “महिला अपराधों की विवेचना में सुधार” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य महिला एवं बाल अपराधों की विवेचना को ओर अधिक प्रभावी, त्रुटिरहित एवं तकनीकी दृष्टि से सुदृढ़ बनाना था। इस कार्यशाला में प्रदेशभर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (महिला सुरक्षा), उप पुलिस अधीक्षक (महिला सुरक्षा), महिला थाना प्रभारी तथा उप निरीक्षक स्तर के विवेचक सहित कुल 62 पुलिस अधिकारी प्रतिभागी के रूप में सम्मिलित हुए।

कार्यशाला का शुभारंभ विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) श्री अनिल कुमार द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद विवेचना के दौरान दोनों पक्षों को सुनते हुए समस्त साक्ष्यों का समुचित संकलन एवं विश्लेषण किया जाए तथा पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध होने पर ही अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने विवेचकों को निर्देशित किया कि वे अपने पुराने प्रकरणों के निर्णयों का गंभीरता से अध्ययन करें और उनमें हुई त्रुटियों से सीख लेकर भविष्य की विवेचनाओं में सुधार करें।

उन्होंने महिला थानों में आने वाली पीड़िताओं एवं शिकायतकर्ताओं की संवेदनशीलता के साथ सुनवाई पर विशेष बल दिया। साथ ही दोषमुक्ति की दर कम करने, प्रभावी साक्ष्य संकलन सुनिश्चित करने तथा पुलिस, अभियोजन एवं अन्य सहयोगी इकाइयों के मध्य बेहतर समन्वय और तकनीकी दक्षता बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रतिभागियों से विस्तृत चर्चा की।

कार्यशाला में विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए गए। बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों में आयु निर्धारण विषय पर श्रीमती किरणलता केरकेट्टा, उप पुलिस महानिरीक्षक (महिला सुरक्षा); पॉक्सो एक्ट पर सुश्री मनीषा पटेल, एडीपीओ (पुलिस आयुक्त कार्यालय भोपाल); डीएनए सैम्पल के प्रकार एवं सैम्पलिंग के दौरान सावधानियों पर डॉ. ए.के. सिंह, फोरेंसिक विशेषज्ञ; यौन उत्पीड़न के मामलों में साइबर की भूमिका पर श्री प्रणय नागवंशी, एसपी (सायबर); तथा विवेचना को सुदृढ़ बनाने की प्रक्रिया पर सुश्री प्रियंका उपाध्याय, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी, जिला अभियोजन संचालनालय भोपाल एवं सुश्री अर्चना तिवारी, उप निरीक्षक, नगरीय भोपाल द्वारा जानकारी दी गई।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को पॉक्सो एक्ट के महत्वपूर्ण प्रावधान, साक्षी संरक्षण योजना, पीड़िता की पहचान के प्रकटीकरण पर रोक तथा पीड़िता के अधिकारों के संबंध में विस्तार से अवगत कराया गया। साथ ही डीएनए प्रोफाइलिंग, डीएनए फिंगरप्रिंट, सैम्पलिंग की वैज्ञानिक प्रक्रिया, डिजिटल साक्ष्य एवं साइबर फोरेंसिक के उपयोग, यौन उत्पीड़न मामलों में शिकायत की प्रक्रिया तथा विवेचना को सुदृढ़ बनाने और त्रुटियों से बचने के उपायों पर भी विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

 

Spread the love