- इक्कीस की उम्र दुनिया का सबसे ख़ूबसूरत मोड़ है। बस यह तय करो कि इस मोड़ पर खड़े होकर नज़ारा देखते रहना है या चलना शुरू करना है।
Udaan Publicity. इक्कीस साल। न पूरे बच्चे, न पूरे बड़े। एक ऐसी उम्र जहां सपने ज़बरदस्त होते हैं, अनुभव लगभग शून्य होता है और आत्मविश्वास ज़रूरत से ज़्यादा। दुनिया एक बड़े बफ़े की तरह सामने फैली होती है सब कुछ चखना है, लेकिन प्लेट छोटी है। कुछ बातें ऐसी हैं जो अगर इक्कीस की उम्र में समझ लो, तो ज़िन्दगी के बहुत सारे ज़ख़्मों से बच सकते हो और जो न समझो तो ज़िन्दगी ख़ुद सिखाएगी, बस फ़ीस बहुत भारी लेगी।
इसे धन, प्रेम, समय और जीवन। इन चार बातों के आधार पर समझते हैं
पैसा कमाना और बचाना सीखें
पैसे कैसे कमाना है ये सीखो। 21 की उम्र में यदि आपने पैसे कमाने की ठान ली तो आपको अमीर बनने से कोई नहीं रोक सकता। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखो कि, कमाना तो बहुत लोग सीख लेते हैं असली हुनर है पैसे को काम पर लगाना। अपने पैसे को ऐसे निवेश करो कि वो और पैसा बनाए। चाणक्य ने कहा था “धन को गतिमान रहना चाहिए, रुका हुआ धन नष्ट हो जाता है।” पैसे की सबसे बड़ी ताक़त उसका प्रवाह है जमा करने में नहीं, सही जगह लगाने में।
क़ानूनी बातें सीखो
टैक्स, बिल, इंश्योरेंस, कॉन्ट्रैक्ट। ये उबाऊ लगता है, इसीलिए अधिकतर कम्पनियां इसका फ़ायदा उठाती हैं। कॉन्ट्रैक्ट कितने समय का है, कैंसिल कब कर सकते हो ये पढ़ो। अपने माता-पिता या किसी अनुभवी से टैक्स और ब्याज की बुनियादी बातें सीखो। थोड़ी सी जानकारी बहुत बड़ी बचत करा सकती है।
बेचना सीखो : ये सुनने में अजीब लगता है, लेकिन दुनिया की हर नौकरी में बेचना ज़रूरी है चाहे वो प्रोडक्ट हो या आइडिया। धीरूभाई अम्बानी मसालों की गठरी बेचकर अपने सफ़र की शुरुआत किए थे और उन्होंने कभी ये कला नहीं छोड़ी। जो बेचना जानता है, वह कहीं भी असफल नहीं होता।
प्रेम : दिल का मामला, दिमाग़ से चलाओ
प्रेम आसान नहीं है। फ़िल्मों में दिखाते हैं कि दो नज़रें मिलीं और प्यार हो गया। ज़िन्दगी में दो नज़रें मिलती हैं और फिर शुरू होती है असली मेहनत। रिश्ते में बातचीत लगती है, बहस लगती है, समय लगता है, और प्रयास लगता है। कठिन बातचीत से भागो मत उसी में रिश्ता पकता है। जितनी ज़्यादा ईमानदार बातें होंगी, उतनी गहरी जड़ें जमेंगी।
प्रेम पर निर्भर मत बनो। जो अपने साथी पर पूरी तरह निर्भर हो जाता है, वह ख़ुद को धीरे-धीरे खो देता है। अपनी ज़िन्दगी जियो और अपने साथी को उस यात्रा में शामिल करो। इससे तुम उनके साथ इसलिए रहोगे क्योंकि तुम चाहते हो इसलिए नहीं कि तुम्हें उनकी ज़रूरत है।
समय : सबसे ईमानदार और सबसे बेरहम दोस्त
“शुरू करने के लिए तुम बूढ़े नहीं हो, शुरू न करने के लिए बूढ़े हो।”
किसी भी शुरूआत के लिए और इंतज़ार मत करो। हमेशा कोई बहाना मिलेगा “अभी सही वक़्त नहीं है,” “पहले और तैयारी कर लूं,” “अगले साल से शुरू करूंगा।” मगर सही वक़्त कभी नहीं आता। जो करना है, अभी करो। सबसे बुरा क्या होगा? एक और असफलता, जिससे कुछ सीखोगे। सबसे अच्छा? वो सब मिल जाएगा जो चाहते हो, सोचा था उससे कहीं पहले।
KFC की कहानी से सीखो हारकर जीतना
KFC के संस्थापक कर्नल हारलैंड सैंडर्स ने 65 साल की उम्र में अपनी चिकन रेसिपी बेचनी शुरू की। एक हज़ार से ज़्यादा बार रिजेक्ट हुए। एक हज़ार से ज़्यादा बार। फिर भी नहीं रुके। अगर वो 65 में शुरू कर सकते हैं, तो तुम 21 में क्यों नहीं?
लगे रहो-बाक़ी सब बेमानी है। प्रतिभा, मेहनत, ज्ञान, टाइमिंग -सब मायने रखते हैं, मगर सबसे ऊपर है निरंतरता। ज़्यादातर लोग बहुत जल्दी हार मान लेते हैं इसीलिए वे कभी वहां नहीं पहुंचते जहां पहुंचना चाहते हैं।
उस्ताद अलाउद्दीन ख़ो से किसी ने पूछा कि इतने बरसों से सरोद बजाने के बाद भी रोज़ रियाज़ क्यों करते हैं? उन्होंने कहा-“एक दिन न बजाऊँ तो मुझे पता चलता है। दो दिन न बजाऊँ तो मेरे शिष्यों को पता चलता है। तीन दिन न बजाऊँ तो दुनिया को।”
लगे रहो-भले ही प्रगति धीमी पड़ जाए।
बस एक ही वक़्त है “अभी” तुम्हारा अतीत अब मायने नहीं रखता। हर किसी की ज़िन्दगी में मुश्किलें होती हैं तुम्हारी मुश्किलें तुम्हें स्पेशल नहीं बनातीं। जो मायने रखता है वह ये है कि अभी, इस पल, तुम क्या करोगे। शिकायत करते रह सकते हो कुछ नहीं बदलेगा। या फिर हिम्मत करो, कुछ नया करो, “अभी” को अपनी ज़िन्दगी का सबसे अच्छा वक़्त बनाओ।
रोमन दार्शनिक सेनेका ने दो हज़ार साल पहले लिखा था “हम सब शिकायत करते हैं कि ज़िन्दगी छोटी है, मगर हम ही उसे बर्बाद करते हैं।” समय किसी को कम नहीं मिला बस किसी ने उसे ज़्यादा गम्भीरता से लिया। तुम्हारा समय तय करता है तुम्हारा भविष्य। दिन में 24 घंटे हैं तुम्हारे पास भी, एलन मस्क के पास भी, सड़क पर चाय बेचने वाले के पास भी। अब तक तुमने उन 24 घंटों का जो इस्तेमाल किया, उसी ने तुम्हें यहां पहुंचाया है। कहीं और पहुंचना है? तो कुछ और करो।
जीवन : सबसे बड़ा खेल, जिसमें कोई रिहर्सल नहीं
तुम ज़िम्मेदार हो और कोई नहीं। तुमने जो भी फ़ैसले लिए, तुमने लिए। हमेशा एक और रास्ता भी था तुमने या तो उसे देखा नहीं, या वह मुश्किल था तो चुना नहीं। मगर इसका मतलब यह है कि तुम्हारे हालात तुम्हारे बनाए हुए हैं। इसे स्वीकार करो। हालात को या लोगों को दोष देना बंद करो। जिस दिन तुम अपनी ज़िन्दगी की पूरी ज़िम्मेदारी लोगे, उस दिन से तुम अपनी शर्तों पर जीना शुरू करोगे और यही सबसे बड़ी आज़ादी है।
तुम कुछ भी पा सकते हो, लेकिन सब कुछ नहीं। पूरा दिन टीवी देखते रहो और साथ में एक कामयाब बिज़नेस भी चलाओ ये नहीं होगा। कुछ चीज़ें एक-दूसरे के ख़िलाफ़ हैं। मगर इनमें से कोई भी एक चीज़ तुम पा सकते हो! सवाल यह है कि तुम कौन सी चुनोगे? कभी-कभी कुछ छोटी चीज़ें छोड़नी पड़ती हैं ताकि बड़ी चीज़ों के लिए जगह बन सके।
सिलिकन वैली के सबसे गहरे विचारकों में से एक नवल रविकांत कहते हैं: “Desire is a contract you make with yourself to be unhappy until you get what you want.” हर इच्छा एक क़रार है जो तुम ख़ुद से करते हो कि जब तक ये न मिले, मैं दुखी रहूंगा। तो चुनो ध्यान से कि कौन सा क़रार करना है।
ख़ुशी अभी मिल सकती है कल का इंतज़ार मत करो। खड़े हो जाओ, मुस्कुराओ, अपने सपने चिल्लाकर बोलो तुरन्त कुछ बेहतर महसूस होगा। अगर तुम ख़ुशी के लिए कल पर निर्भर रहोगे, तो हमेशा एक भूत का पीछा करते रहोगे जो कभी पकड़ में नहीं आएगा। आज क्या कर सकते हो जो तुम्हें ख़ुश करे वह करो। हर दिन ऐसे जियो जैसे आख़िरी हो। क्योंकि एक दिन सच में आख़िरी होगा।
स्टीव जॉब्स ने स्टैनफ़ोर्ड में अपने मशहूर भाषण में कहा था कि वे हर सुबह आईने में ख़ुद से पूछते थे, “अगर आज मेरी ज़िन्दगी का आख़िरी दिन हो, तो क्या मैं वो करूंगा जो आज करने वाला हूं?” और जब लगातार कई दिन जवाब “नहीं” आता, तो वे समझ जाते कि कुछ बदलना है।
एक आख़िरी बात : जो किसी कैटेगरी में नहीं आती
इक्कीस की उम्र में यह भ्रम सबसे ख़तरनाक होता है कि “मुझे सब पता है।” तुम्हें नहीं पता। और ये न जानना ही तुम्हारी सबसे बड़ी ताक़त है क्योंकि जो नहीं जानता, वह सीख सकता है। जो “जानता” है, वह रुक जाता है।
सुकरात से ज़्यादा बुद्धिमान व्यक्ति पूरे एथेंस में नहीं था। मगर जब ऑरेकल ने उन्हें सबसे बुद्धिमान घोषित किया, तो उन्होंने कहा, “मैं बस इतना जानता हूं कि मैं कुछ नहीं जानता।”
यही वो नम्रता है जो नए दरवाज़े खोलती है।
तो सीखते रहो। गिरते रहो। उठते रहो।

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