BHAVYA Scheme : अब अब फैक्ट्री लगाना चाहते हैं तो बस प्रॉडक्शन शुरू करने की सोचिए, बाकी सारे झंझट सरकार उठाएगी। मोदी सरकार ने 33,660 करोड़ रुपये की भव्य (BHAVYA) योजना को मंजूरी दे दी है, जो कारोबारियों को बना-बनाया ‘प्लग-एंड-प्ले’ इकोसिस्टम देगी। इसका मतलब है कि अब आपको जमीन खरीदने या सरकारी मंजूरियों के लिए महीनों इंतजार नहीं करना होगा। आपको बस अपनी मशीनें लानी हैं और उत्पादन शुरू कर देना है।
क्या है भव्य योजना?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए ‘भारत औद्योगिक विकास योजना’ (BHAVYA) को हरी झंडी दिखा दी है। यह योजना सरकार के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगी। इसके तहत पूरे देश में 100 ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इन पार्कों का आकार 100 एकड़ से लेकर 1000 एकड़ तक होगा। यह कदम उन निवेशकों और स्टार्टअप्स के लिए बेहद अहम है जो बुनियादी ढांचे की कमी और देरी के कारण अपना काम शुरू नहीं कर पाते थे। मोदी सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना पर 33,660 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक विकास को मंजूरी दी
यह पूरी योजना नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) के विजन पर आधारित है। एनआईसीडीपी का मुख्य फोकस भारत में ‘औद्योगिक स्मार्ट शहरों’ का विकास करना है। भव्य योजना इसी कार्यक्रम के तहत पहले से विकसित किए गए स्मार्ट शहरों की सफलता को अब देश के कोने-कोने तक ले जाएगी। इसका मूल उद्देश्य भारत की विनिर्माण प्रतिस्पर्धा को वैश्विक स्तर पर बढ़ाना और बड़े विदेशी निवेशकों को आकर्षित करना है।
प्लग एंड प्ले मॉडल क्या है?
प्लग एंड प्ले को इस रूप में सोच सकते हैं मानो कि इलेक्ट्रिक बोर्ड में बिजली दौड़ रही है और आपने मशीन का प्लग किया और कम शुरू। सरकार ने भव्य योजना के तहत कुछ ऐसा ही लक्ष्य रखा है। सरकार उद्योगों को बना-बनाया इकोसिस्टम देगी। इसमें पहले से स्वीकृत जमीन, तैयार इन्फ्रास्ट्रक्चर और एकीकृत सेवाएं शामिल होंगी। इससे कंपनियों को जमीन खरीदने या मंजूरी लेने में होने वाली देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे तुरंत उत्पादन शुरू कर सकेंगी। इस तरह, भव्य योजना ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी कारोबार सुगमता के अभियान को एक कदम और आगे बढ़ाएगी।
वित्तीय सहायता और सुविधाओं का ढांचा
सरकार इस योजना के तहत प्रति एकड़ 1 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता देगी। इन पार्कों में तीन तरह की सुविधाएं मिलेंगी-
- मूलभूत ढांचा : सड़कें, जल निकासी, पानी, और आईटी सिस्टम।
- वैल्यू ऐडेड सुविधाएं : तैयार कारखाने (फैक्ट्री शेड), टेस्टिंग लैब और वेयरहाउस।
- सामाजिक ढांचा : श्रमिकों के रहने के लिए घर और अन्य जरूरी सुविधाएं।
प्रॉजेक्ट की कुल लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा सड़क-रेल लिंक जैसी बाहरी कनेक्टिविटी सुधारने के लिए भी दिया जाएगा।
‘चैलेंज मोड’ से होगा राज्यों का चयन
पार्कों के विकास के लिए राज्यों और निजी भागीदारों के बीच कॉम्पिटिशन होगा। इसके लिए ‘चैलेंज मोड’ अपनाया जाएगा। इसका मतलब है कि उन्हीं प्रस्तावों को मंजूरी मिलेगी जो निवेश के लिए पूरी तरह तैयार होंगे और जहां सुधारवादी नीतियां लागू होंगी।
पीएम गतिशक्ति और टिकाऊ विकास पर जोर
इन इंडस्ट्रियल पार्कों को पीएम गतिशक्ति के सिद्धांतों पर डिजाइन किया जाएगा। इसमें मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी होगी ताकि सामान लाने-ले जाने में आसानी हो। साथ ही, यहां ग्रीन ऊर्जा और टिकाऊ संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा। भूमिगत यूटिलिटी लाइनों की वजह से यहां बार-बार खुदाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
NICDC: योजना को जमीन पर उतारने वाली मुख्य एजेंसी
नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NICDC) ही वह नोडल एजेंसी है, जिसे भव्य योजना को लागू करने की अहम जिम्मेदारी दी गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाला यह संस्थान पहले से ही 13 राज्यों में 20 बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं को संभाल रहा है। एनआईसीडीसी की विशेषज्ञता का लाभ अब इन 100 नए पार्कों को मिलेगा, जिससे प्रोजेक्ट्स में देरी की गुंजाइश कम होगी।
रोजगार के लाखों नए अवसरों की उम्मीद
सरकार का मानना है कि इस योजना से मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक सेक्टर में लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इसका फायदा न केवल बड़ी कंपनियों को, बल्कि छोटे उद्योगों (MSMEs) और स्टार्टअप्स को भी होगा। इस तरह कहें तो भव्य परियोजना भारत की आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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