March 25, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

BJP ने बंगाल में फाइनल किए 140 कैंडिडेट, पिछली चुनावी गलतियों से लिया सबक

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने तैयारियां तेज कर दी हैं। गुरुवार को दिल्ली में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई। खबर है कि इस मीटिंग में बंगाल चुनाव के लिए करीब 140 उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए गए हैं। संभावना है कि अप्रैल के आखिर में ही बंगाल में चुनाव कराए जा सकते हैं। भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के पदभार संभालने के बाद चुनाव समिति की यह पहली बैठक थी। यह बैठक पीएम नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर ही थी। आमतौर पर भाजपा मुख्यालय में ही ऐसी बैठकें होती थीं, लेकिन इस बार पीएम मोदी के आवास पर यह बैठक हुई।

राज्य में 294 विधानसभा सीटें हैं और भाजपा लगभग आधी सीटों पर सहमति बना चुकी है। माना जा रहा है कि इस संबंध में जल्दी ही ऐलान हो सकता है। भाजपा का फोकस है कि पहली लिस्ट जारी करने में बढ़त हासिल कर ली जाए। इसके अलावा कई पूर्व सांसदों को विधानसभा में उतारने का भी प्लान है। पहली लिस्ट में जिन लोगों के नाम आ सकते हैं, उनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और पूर्व केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक और शुभेंदु अधिकारी शामिल हैं। हालांकि एक बदलाव पिछली बार के मुकाबले यह है कि मौजूदा सांसदों को नहीं उतारा जाएगा। 2021 के चुनाव में भाजपा 77 सीटों पर जीत हासिल करके मुख्य विपक्षी दल बन गई थी।

हालांकि कई विधायकों के पार्टी छोड़ने के चलते फिलहाल राज्य में उसके पास 65 की ही संख्या है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर विधायकों को फिर से टिकट मिल सकता है। एक रणनीति यह भी बदली है कि इस बार सिलेब्रिटी या फिर टीएमसी छोड़कर आने वाले लोगों को मौके नहीं दिए जाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि दलबदलुओं के फिर से दूसरे खेमे में जाने की संभावना अधिक रहती है। इसके अलावा सिलेब्रिटी स्टेटस रखने वाले लोग भी कुछ समय बाद राजनीतिक सक्रियता कम कर देते हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी के पुराने नेताओं और वफादारों को ही मौका दिया जाएगा। ऐसा इसलिए ताकि कैडर उत्साहित रहे और जनता के बीच यह छवि भी बने कि भाजपा में आम कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाता है।

क्यों भाजपा ने इस बार बदल दी 2021 वाली रणनीति
2021 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर उतरे कई नेताओं ने बाद में पाला बदल लिया था। ऐसे में भाजपा ने शायद सबक सीखा है। तब भाजपा ने टीएमसी से आए कई नेताओं और फिल्मी कलाकारों को खूब मौके दिए थे। उम्मीदवारों के चयन में जिताऊ फैक्टर को ध्यान में रखा गया है। इसके अलावा संगठन क्षमता, जाति समीकरण और संगठन के लिए प्रतिबद्धता जैसे फैक्टरों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। गौरतलब है कि भाजपा ने राज्य में चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है। हाल ही में अमित शाह ने एक रैली में वादा किया था कि भाजपा के सत्ता में आते ही सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया जाएगा।

Spread the love