April 5, 2026

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वैश्विक संकट के बीच बंपर खरीददारी, FMCG Sector में उछाल

FMCG sector booms in India : बाजार की उठापटक और दुनिया भर में चल रहे तनाव के बीच भारतीय घरों की जरूरत का सामान बनाने वाली कंपनियों (FMCG) के लिए अच्छी खबर आई है। साल 2025-26 की आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च) के नतीजे बता रहे हैं कि महंगाई और बाहरी चुनौतियों के बावजूद लोगों ने खरीदारी कम नहीं की है।

मैरिको और डाबर जैसी बड़ी कंपनियों ने इस दौरान अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है। मैरिको, डाबर और एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस (Adani Wilmar) जैसी कंपनियों ने दिखाया है कि सही दाम और बेहतर प्रोडक्ट के दम पर मंदी को मात दी जा सकती है। आइए जानते हैं कंपनियों का रिपोर्ट कार्ड इस बार कैसा रहा है और आने वाले दिनों में सामान सस्ता होगा या महंगा।

मैरिको और डाबर के सेल में हुई बढ़ोतरी

कंपनियों ने इस तिमाही में मात्रा (Volume) और कीमत (Value) दोनों के मामले में बढ़त बनाई है:

मैरिको (Marico): कंपनी ने बताया कि उसकी कमाई में सालाना आधार पर करीब 20% की भारी बढ़ोतरी हुई है। इसका क्रेडिट हेयर ऑयल कैटेगरी में शानदार सेल और इंटरनेशनल मार्केट से मिली अच्छी डिमांड को जाता है।

डाबर (Dabur): डाबर ने भी संतुलित प्रदर्शन किया है। हालांकि पश्चिम एशिया के तनाव ने इनके विदेशी कारोबार को थोड़ा प्रभावित किया, लेकिन भारत में जबरदस्त डिमांड ने उसकी भरपाई कर दी। कंपनी को उम्मीद है कि भारतीय बाजार में उनकी ग्रोथ सिंगल डिजिट के ऊपरी स्तर पर रहेगी।

एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस की लंबी छलांग

आजकल लोग दुकान जाने के बजाय फोन से सामान मंगवाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस (AWL Agri Business) के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। कंपनी ने बताया कि क्विक कॉमर्स, ऑनलाइन बिजनेस और मॉडर्न रिटेल के जरिए उनकी सेल में 43% की जोरदार बढ़ोतरी हुई है। इससे साफ है कि अब लोग तेज और आसान डिलीवरी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

आगे क्या उम्मीद?

कंपनियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में हालात और बेहतर हो सकते हैं। महंगाई में कमी आने से उनके मार्जिन में सुधार हो सकता है और घरेलू मांग में भी लगातार सुधार जारी रहने की संभावना है। हालांकि, कंपनियां पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं और बाहरी जोखिमों को देखते हुए सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही हैं।

सप्लाई चेन पर नजर

भले ही घरेलू बाजार मजबूत है, लेकिन पश्चिम एशिया का संकट एफएमसीजी सेक्टर के लिए चिंता का विषय है। अगर वहां हालात और बिगड़ते हैं, तो माल ढोने की लागत बढ़ सकती है और सप्लाई चेन में रुकावट आ सकती है। कंपनियां इन बाहरी जोखिमों को लेकर अलर्ट मोड पर हैं।

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