भिवानी.
अक्सर समाज के हाशिए पर रहने वाले किन्नर समुदाय ने भिवानी की धरती से एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने ममता और स्वीकार्यता की नई परिभाषा गढ़ी है। गुरुवार को शहर की गलियां उस समय खुशियों से सराबोर हो गईं, जब किन्नर समाज ने नवजात बच्चे का विधि-विधान के साथ कुआं पूजन किया।
यह उत्सव केवल एक परंपरा का निर्वहन नहीं था, बल्कि उन संकीर्ण विचारधाराओं को करारा जवाब था, जो किन्नर बच्चों को तिरस्कार की दृष्टि से देखते हैं। गौरतलब होगा कि किन्नर बच्चे का कुआं पूजन कार्यक्रम भिवानी ही नहीं, अपितु हरियाणा प्रदेश में पहली बार किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व किन्नर समाज की महंत बुलबुल ने किया। जीतू वाला जोहड़ स्थित किन्नर समाज आश्रम से शुरू हुआ यह उत्सव ढोल-नंगाड़ों की थाप और मंगल गीतों के साथ कृष्णा कालोनी स्थित स्वर्ग आश्रम तक पहुंचा। नाचते-गाते समुदाय के सदस्यों ने यह संदेश दिया कि हर बच्चा ईश्वर का रूप है और उसका स्वागत उसी भव्यता से होना चाहिए जैसा किसी भी अन्य बच्चे का होता है। इस दौरान आश्रम में हवन एवं नामकरण कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ।
विचारधारा हो जाती है संकीर्ण: महंत बुलबुल
महंत बुलबुल ने समाज की कड़वी सच्चाई को साझा करते हुए कहा कि अक्सर देखा जाता है कि किन्नर बच्चे के जन्म लेते ही उसके प्रति समाज और परिवार की विचारधारा संकीर्ण हो जाती है। कई बार तो जन्म से ही उनका शोषण शुरू हो जाता है। हमने भिवानी से एक मुहिम शुरू की है कि यदि किसी के घर किन्नर बच्चा पैदा होता है, तो उसे लावारिस छोड़ने या प्रताड़ित करने के बजाय हमें सौंप दें। उन्होंने आगे कहा कि हम उसका पालन-पोषण अपनी संतान की तरह करेंगे। इस अवसर पर नवजात को महंत खुशी, तनीषा, तेजशिया, काजल, सोना, मन्नत, मीनाक्षी, रेखा, रचना, रेशमा सहित सभी महंतों ने अपना आशीर्वाद दिया।

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