March 30, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

भगोरिया मेले में रील बनाने की होड़, किसी के फॉलोअर्स बढ़े 3000, ₹500 में मिल रही ‘इंस्टेंट एडिटिंग’ सर्विस

झाबुआ
 मांदल की थाप, उड़ता हुआ गुलाल और पारंपरिक वेशभूषा… भगोरिया का मेला हमेशा से अपनी इसी रौनक के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन इस बार मेले की तस्वीर थोड़ी बदली-बदली नजर आई। अब यहां युवा सिर्फ नाचने-गाने नहीं, बल्कि कंटेंट बनाने भी आ रहे हैं। ढोल बजते ही मोबाइल के कैमरे ऑन हो जाते हैं और देखते ही देखते अलीराजपुर और झाबुआ का यह पारंपरिक त्योहार इंस्टाग्राम की फीड पर छा जाता है।

5 दिन में 3 हजार फॉलोअर्स
भगोरिया से जुड़े वीडियो पोस्ट करने वाले दीपक बताते हैं कि महज पांच दिनों में उनके पेज पर 3,000 नए फॉलोअर्स जुड़ गए। आलम यह है कि दिल्ली और मुंबई में रहने वाले लोग मैसेज करके पूछ रहे हैं कि अगला मेला कब और कहां लगेगा? पलायन की वजह से जो युवा बाहर चले गए थे, उनके लिए अब भगोरिया सिर्फ घर वापसी का जरिया नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर अपनी जड़ों को दिखाने का एक बड़ा मंच बन गया है।

गहनों के साथ चश्मा और ब्रांडेड जूते
मेले में आई कॉलेज स्टूडेंट रेखा लोहारिया कहती हैं, 'यह हमारा सबसे बड़ा त्योहार है। इसे सिर्फ यहां के लोग ही क्यों देखें? मेरे सूरत और अहमदाबाद के दोस्त हर साल मेरे वीडियो का इंतजार करते हैं।' दिलचस्प बात यह है कि इस बार फैशन में भी बदलाव दिखा। पारंपरिक चांदी के गहनों और कढ़ाई वाले ब्लाउज के साथ युवा धूप का चश्मा और ब्रांडेड जूते पहनकर कैमरे के सामने पोज देते नजर आए।

₹200 से ₹500 में 'इंस्टेंट रील' का धंधा
इस ट्रेंड का फायदा स्थानीय फोटोग्राफर्स भी उठा रहे हैं। वे ₹200 से ₹500 के बीच मौके पर ही प्रोफेशनल रील्स बनाकर, एडिटिंग और म्यूजिक के साथ दे रहे हैं। हालांकि, बुजुर्ग इस बदलाव से थोड़े असहज हैं। झाबुआ के नत्थू सिंह कहते हैं, 'पहले लोग त्योहार में शामिल होने आते थे, अब सिर्फ रिकॉर्ड करने आते हैं।'

बुजुर्गों की चिंता पर युवाओं का तर्क
बुजुर्गों की चिंता पर युवाओं का अपना तर्क है। गुजरात की टेक्सटाइल यूनिट में काम करने वाले राकेश कहते हैं, 'हम अपनी पहचान दुनिया को दिखा रहे हैं। अगर हम इसे पोस्ट नहीं करेंगे, तो कोई और हमारी कहानी अपने तरीके से बताएगा।' भगोरिया अब सिर्फ एक मेला नहीं रह गया है, बल्कि एक डिजिटल ग्लोबल स्टेज बन चुका है।

Spread the love