बाग। मध्यप्रदेश के धार जिले के छोटे से कस्बे बाग निवासी प्रक्षाल जैन (Prachal Jain UPSC Topper) ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Exam) में अखिल भारतीय रैंक 8 (AIR 8) हासिल की है। नतीजे घोषित होते ही जैन परिवार के घर बधाइयों की कतार लग गई और पूरे कस्बे में खुशी का माहौल छा गया। लोगों ने मिठाई बांटकर और आतिशबाजी कर खुशियां मनाईं।
माता-पिता का आशीर्वाद
पक्षाल का कहना है कि माता-पिता का आशीर्वाद और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रही। उनके पिता निलेश जैन कपड़ा व्यवसायी हैं, जबकि माता दीप्ति जैन गृहिणी हैं। परिवार के अनुसार प्रक्षाल बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं और उन्होंने कड़ी मेहनत व लगन से यह मुकाम हासिल किया।
कपड़े का व्यापार करते हैं पिता, मां गृहिणी
प्रक्षाल जैन एक साधारण परिवार से हैं. उनके पिता नीलेश जैन बाग में कपड़े का व्यापार करते हैं, जबकि माता दीप्ति जैन गृहिणी हैं। प्रक्षाल की सफलता ने पूरे परिवार के साथ‑साथ पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया है। बताया जा रहा है कि प्रक्षाल शुरू से ही पढ़ाई में अत्यंत मेधावी रहे। प्रारंभिक शिक्षा बाग में ही पूरी की। आगे की पढ़ाई इंदौर में जारी रखी। ग्रेजुएशन IIT कानपुर से फाइनेंस में किया। IIT से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की और कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतरता के दम पर देश की सबसे कठिन परीक्षा में टॉप‑10 में जगह बनाई।
दिल्ली में रहकर तैयारी
पक्षाल वर्ष 2022-23 में दिल्ली चले गए और वहीं रहकर यूपीएससी की तैयारी की। उनकी छोटी बहन क्रिया जैन ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। कई बार ऐसा समय भी आया जब वे रोजाना केवल 3 से 4 घंटे ही सोते थे और दिनभर लाइब्रेरी में पढ़ाई करते थे।
प्रयास जारी रहा
पहले प्रयास में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) मिलने की संभावना थी, लेकिन उनका लक्ष्य आईएएस बनना था, इसलिए उन्होंने तैयारी जारी रखी। दूसरे प्रयास में वे प्रीलिम्स में ही रह गए, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल करते हुए ऑल इंडिया रैंक 8 प्राप्त की। तैयारी के दौरान कई चुनौतियां भी सामने आईं। एक बार इंटरव्यू से एक दिन पहले उनका पैर मुड़ गया था, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पक्षाल जैन की इस सफलता से बाग सहित पूरे क्षेत्र के युवाओं को प्रेरणा मिली है कि छोटे कस्बों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

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