- ईदगाह में होगी पहली नमाज
- तीन चलेगा खुशियों का सिलसिला
- आखरी दिन बाजारों में उमड़ा जन सैलाब
- बदले मौसम ने भी बनाया माहौल खुशनुमा
खान आशु, भोपाल
मुकम्मल 30 रोजे, इतनी ही तरावीह और कुरआन सुनने पढ़ने का सिलसिला, पांच जुमा की अदायगी का ईनाम ईदुल फितर शनिवार को पूरे देश में छाया हुआ है। राजधानी भोपाल में ईद की पहली नमाज ईदगाह में सुबह 7.30 बजे होगी। काजी ए शहर सैयद मुश्ताक अली नदवी साहब इसे अदा कराएंगे। खुशियों का यह सिलसिला तीन दिन तक जारी रहेगा। इस बीच अचानक बदले मौसम ने फिजाओं को खुशगवार कर दिया है।
ईद-उल-फितर इस्लाम धर्म का प्रमुख त्योहार है। इसे रमज़ान के पूरे महीने रोज़ा रखने के बाद मनाया जाता है। इस दिन लोग नमाज़ पढ़ते हैं, एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं और मीठी सेवइयां बांटते हैं। घर के बड़े छोटों को ईदी के तौर पर तोहफे भी देते हैं।
ईद उल फितर हर साल शव्वाल माह में मनाई जाती है। ईद का त्योहार कब मनाया जाएगा, यह चाँद दिखने के आधार पर तय होता है। ईद उल फितर को मीठी ईद या छोटी ईद भी कहा जाता है। भोपाल शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि रमजान के 30 रोजे पूरे होने के बाद ये अल्लाह का इनाम है कि अल्लाह ईद जैसी नेमत को हमें दे रहा है। ईद पर जकात दिया जाता है। वहीं, ईद की विशेष नमाज अदा की जाती है। इस नमाज के बाद सामूहिक दुआ में देश दुनिया में अमन भाईचारे और एकता बनाए रखने की अल्लाह से दुआ करते हैं और अल्लाह से यह भी मांगते हैं कि अल्लाह हमारे मुल्क में भाईचारा कायम रहे। मुसलमान का यह सबसे बड़ा त्योहार है इस दिन लोग नए-नए कपड़े भी पहनते हैं।
भारत और सऊदी अरब में अलग-अलग दिन मनाई जाती है ईद
इस अंतर की सबसे बड़ी वजह है चांद का दिखना। भारत में ईद की तारीख चांद देखने पर निर्भर करती है। जब रमज़ान का महीना खत्म होता है, तब नए चांद को देखकर ईद का ऐलान किया जाता है। अगर चांद दिखाई दे जाता है, तो अगले दिन ईद होती है और अगर नहीं दिखता, तो एक दिन बाद मनाई जाती है। सऊदी अरब भारत के मुकाबले पश्चिम दिशा में स्थित है। इसका मतलब है कि वहां सूरज भारत से थोड़ी देर बाद डूबता है। इस वजह से चांद को दिखने का थोड़ा ज्यादा समय मिल जाता है। इसलिए कई बार सऊदी अरब में चांद जल्दी नजर आ जाता है, बस इसी कारण भारत में अक्सर एक दिन बाद ईद मनाई जाती है।
हर साल क्यों बदल जाती है ईद की तारीख?
इस्लामिक कैलेंडर चाँद पर आधारित होता है, जो अंग्रेजी कैलेंडर से करीब 11 दिन छोटा होता है। इसी कारण हर साल ईद की तारीख बदलती रहती है और अलग-अलग देशों में एक दिन के अंतर में ईद मनाई जाती है। यानी ईद की तारीख में अंतर होना पूरी तरह से चांद की स्थिति पर निर्भर करता है।
नमाज का वक्त
- ईदगाह सुबह 7.30 बजे
- जामा मस्जिद सुबह 7.45 बजे
- ताजुल मसाजिद सुबह 8 बजे
- मोती मस्जिद सुबह 8.15 बजे
- मस्जिद रब्बानी प्रेस कॉम्प्लेक्स सुबह 9 बजे

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