Gold and silver crash : उलझन में निवेशक बेचें, खरीदें या इतजार करें
उड़ान न्यूज डेस्क। बीते एक सप्ताह में जिस रिकॉर्ड तेजी के साथ सोना और चांदी की कीमतें गिरी हैं, इससे निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है, वहीं इस ऐतिहासिक गिरावट से बाजार के जानकार और विश्लेषक भी हैरान हैं। सराफा बाजार में आंधी की तरह आई इस गिरावट ने पूरे बाजार को प्रभावित किया है। अमूमन प्रापर्टी के बाद गोल्ड और सिल्वर में निवेश करना सुरक्षित माना जाता है, इस लिहाज से देखें तो एकाएक आई इस बड़ी गिरावट ने इस भरोसे को तोड़ दिया है। सोना और चांदी में आगे गिरावट जारी रहेगी, स्थिरता आएगी या यहां से कीमतें फिर उछलेंगी, कहना मुश्किल है। हालांकि, आम निवेशकों के लिए यह निवेश का सुनहरा मौका भी है, लेकिन जोखिम भी बना हुआ है, बाजार के जानकार इस मामले में फिलहाल कुछ भी सलाह देने से बच रहे हैं। शेयर बाजार में जिन्होंने ऊंची कीमत में खरीददारी की है वे अब समझ नहीं पा रहे हैं कि बेचें, खरीदें या अभी और इतजार करें।
मुनाफावसूली और वैश्विक दबाव

30 जनवरी 2026 को 24 कैरेट सोना 8,230 रुपए से गिरकर 1,70,620 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया था। दरअसल, मुनाफावसूली और वैश्विक दबाव के कारण 22K और 18K सोने के दाम भी धड़ाम हुए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में 15% का जोरदार लोअर सर्किट लगा, जिससे भाव अपने रू 4.20 लाख के शिखर से सीधे गोता लगाकर रू 3.40 लाख के स्तर पर आ गिरे। सोने की चमक भी इस बिकवाली के दबाव में फीकी रही और यह लगभग 9% की गिरावट के साथ रू 1.83 लाख से लुढ़ककर रू 1.54 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में सिमट गया। अचानक आई इस गिरावट ने भले ही आम खरीदारों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है, वहीं बड़े निवेशकों की धडकनें तेज कर दी है।
वजह यह भी रही
बाजार में मची इस खलबली के पीछे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और घरेलू समीकरणों का एक जटिल ताना-बाना काम कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस मंदी का सबसे प्राथमिक कारण ‘मुनाफावसूली’ (Profit Booking) है। पिछले कुछ हफ्तों से सोने-चांदी की कीमतें किसी रॉकेट की तरह ऊपर भाग रही थीं। चांदी ने महज आठ दिनों में 3 लाख से 4 लाख का सफर तय किया था, जिसे देख बड़े निवेशकों और हेज फंड्स ने ऊंचे स्तरों पर अपनी पोजीशन खाली करना ही बेहतर समझा। इस भारी बिकवाली ने बाजार में आपूर्ति का दबाव इतना बढ़ा दिया कि खरीदार पीछे हट गए और कीमतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। वैश्विक मोर्चे पर अमेरिकी राजनीति और आर्थिक नीतियों ने भी इस गिरावट में घी का काम किया है।
यहां टिकी हैं उम्मीदें
भले ही वर्तमान में बाजार डरा हुआ नजर आ रहा है, लेकिन विशेषज्ञ इसे एक स्वस्थ ‘मार्केट करेक्शन’ के रूप में देख रहे हैं। भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर पश्चिम एशिया और यूक्रेन संकट, अब भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं, जो भविष्य में सोने को फिर से सहारा दे सकते हैं। साथ ही, भारत में शादियों का सीजन शुरू होने वाला है, जो भौतिक सोने की मांग को दोबारा गति देगा। फिलहाल के लिए, यह गिरावट उन निवेशकों के लिए एक स्वर्णिम अवसर हो सकती है जो लंबे समय से सही एंट्री पॉइंट का इंतजार कर रहे थे। इस उथल-पुथल ने स्पष्ट कर दिया है कि 2026 में बुलियन मार्केट की दिशा अब पूरी तरह से वैश्विक आर्थिक नीतियों और केंद्रीय बैंकों के अगले कदम पर टिकी है।
चांदी को लेकर एक्सपर्ट की यह है राय
तकनीकी चार्ट्स पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि अगले एक से दो हफ्तों तक बाजार में दबाव का यह सिलसिला जारी रह सकता है और कीमतें 3.15 लाख रुपए तक भी फिसल सकती हैं। हालांकि, इसे एक स्वस्थ ‘प्राइस करेक्शन’ के तौर पर भी देखा जा रहा है। सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों में चांदी की अपरिहार्य भूमिका को देखते हुए लंबी अवधि के जानकारों का भरोसा अब भी कायम है। उनका मानना है कि यदि मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और गहराता है, तो सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी एक बार फिर अपनी चमक बिखेरेगी। फिलहाल, बाजार एक स्थिरता के दौर (कंसोलिडेशन) की तलाश में है, जहाँ 3.10 लाख रुपए का स्तर एक मजबूत आधार साबित हो सकता है।
भारत में मांग इसलिए भी है मजबूत
हालांकि, भारत में सोना और चांदी का महत्व केवल निवेश तक सीमित नहीं है। सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व के अलावा विवाह और त्योहारों में यहां हमेशा मांग बढ़ती है, वहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सोने की भूमिका अहम है, लोग सोने के साथ ही चांदी को भी नगदी की तरह ही संभालकर अपने पास रखते हैं।

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