भोपाल
मध्यप्रदेश में मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट लेने वाला है। बीते कई दिनों से आंधी-बारिश और बादलों के कारण मिली राहत अब खत्म होने जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार 10 अप्रैल से प्रदेश में तेज गर्मी का दौर शुरू होगा और दिन के तापमान में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक उछाल आ सकता है।हालांकि, इससे पहले गुरुवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम सक्रिय रहेगा। उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट जिलों में आंधी, बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट में आंधी, बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया है।
इससे पहले बुधवार को भोपाल, जबलपुर, रायसेन, शिवपुरी, रतलाम, छतरपुर, नर्मदापुरम, उज्जैन, इंदौर, धार समेत 15 से ज्यादा जिलों में बारिश का दौर रहा। इससे दिन के तापमान में भी गिरावट देखने को मिली।
यह सिस्टम एक्टिव रहे
बुधवार को एमपी के उत्तर, पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में 3 साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) एक्टिव रहे। इस वजह से बारिश का दौर रहा। भोपाल में भी हल्की बारिश के साथ तेज आंधी चली।
11 अप्रैल को नया सिस्टम
मौसम विभाग की माने तो 11 अप्रैल को उत्तर-पश्चिमी हिस्से में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव होगा। हालांकि, एमपी में इसका असर कम ही देखने को मिलेगा।
तेज आंधी भी चलेगी
मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश में तेज आंधी भी चलेगी। कुछ जिलों में इसकी अधिकतम रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रहेगी। बाकी में 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी। मौसम का मिजाज दोपहर बाद ही बदलेगा।
अब शुरू होगा असली गर्मी का सीजन
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अप्रैल और मई प्रदेश में गर्मी के पीक महीने होते हैं। इस बार मार्च के आखिरी दिनों में तापमान 41°C के पार पहुंच गया था, लेकिन बार-बार एक्टिव सिस्टम के चलते गर्मी का असर धीमा पड़ा। पिछले 8 दिनों से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार बारिश, ओलावृष्टि और आंधी का दौर बना रहा। फरवरी और मार्च में भी चार-चार बार मौसम बदला, जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ। .
अप्रैल-मई में सबसे ज्यादा गर्मी
जिस तरह दिसंबर-जनवरी में सर्दी और जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह गर्मी के दो प्रमुख महीने अप्रैल और मई हैं। इस बार मध्यप्रदेश में मार्च के दूसरे पखवाड़े में पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा था।
मार्च के आखिरी में टेम्प्रेचर बढ़ने लगता है, लेकिन इस बार ऐसा मौसम नहीं रहा। आखिरी 3 दिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से पारे में गिरावट आई। इसी तरह अप्रैल के पहले पखवाड़े में बारिश, ओले और आंधी का दौर चल रहा है। पिछले 8 दिन से प्रदेश में कहीं न कहीं बारिश हो रही है।
फरवरी-मार्च में 4-4 बार बदला मौसम
इस साल जनवरी में बारिश नहीं हुई, लेकिन फरवरी और मार्च में 4-4 बार मौसम बदला। ठंड के मौसम में ही फरवरी में मौसम का मिजाज बदल गया। शुरुआत में ही प्रदेश में दो बार ओले, बारिश और आंधी का दौर रहा। इससे फसलों को खासा नुकसान हुआ था। इसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार प्रदेश भीग गया है। 19, 20 और 21 फरवरी को भी असर रहा। फिर चौथी बार 23-24 फरवरी को भी ओले-बारिश का दौर रहा।
मार्च में गर्मी के सीजन की शुरुआत हो गई। पहले पखवाड़े में तेज गर्मी वाला मौसम रहा। दूसरे पखवाड़े में बारिश शुरू हो गई। एक दौर लगातार 4 दिन तक रहा। इस दौरान 45 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश हुई। वहीं, 17 जिलों में ओले भी गिरे। इससे गेहूं, पपीता और केले की फसलें बर्बाद हुई है।
तीसरा दौर 26-27 मार्च को रहा। 27 मार्च को सतना, रीवा, दतिया और भिंड में बारिश हुई। सतना के चित्रकूट में आंधी चलने और बारिश होने की वजह से दीप सज्जा के कार्यक्रम पर असर पड़ा था। चौथी बार मौसम ने 29-30 मार्च को फिर से करवट बदली है। 30 मार्च को एमपी के आधे हिस्से में कहीं बारिश-आंधी तो कहीं ओले भी गिरें।

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