उड़ान डेस्क। होटल सेक्टर यानी आतिथ्य सत्कार उद्योग एक विशाल व्यावसायिक क्षेत्र है। व्यापक रूप से देखा जाए तो, इसमें वे सभी आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियां शामिल हैं जो यात्रा और पर्यटन पर निर्भर करती हैं या उसमें योगदान देती हैं। देश में बढ़ते पर्यटन के साथ ही होटलिंग के कारोबार में अच्छी उम्मीदें हैं। सरकार का फोकस भी पर्यटन को बढ़ावा देने का है, ऐसे में होटल सेक्टर आने वाले भविष्य में कमाई को बेहतर जरिया बनेगा। इसकी शुरुआत में बडी पूंजी की जरुरत होती है, लेकिन इसे स्टार्टअप के तौर पर भी शुरु किया जा सकता है। पूरी प्लानिंग के साथ प्रोजेक्ट पर काम किया जाए तो इसमें बैंकों से आसानी से लोन भी मिल सकता है।
यह भी है विकल्प
यदि इस सेक्टर में रुचि है तो इसका दूसरा विकल्प फ्रेंचायजी भी है, आप अपने शहर में इसे आसानी से शुरु कर सकते हैं, कई नामी होटल्स छोटे शहरों में अपनी ब्रांच शुरु करना चाहती है, किसी नामी होटल की फ्रेचायजी लेकर शुरुआत की जा सकती है। होटल सेक्टर में निवेश की शुरुआत करने से पहले निवेशकों को खास ध्यान यह रखना चाहिए कि वे इस सेक्टर में निवेश से पहले होटल की लोकेशन, ब्रांड वैल्यू और कंपनी के फाइनेंस की अच्छी तरह से जांच कर लें।
होटल सेक्टर में निवेश के प्रमुख पहलू
- निवेश के तरीके: निवेशक सीधे होटल में, REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) के माध्यम से, या शेयर बाजार में सूचीबद्ध होटल कंपनियों के माध्यम से कर सकते हैं।
- बाजार की स्थिति (2025): 2025 में 4250 करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड निवेश देखने को मिल रहा है। प्रीमियम होटल सेक्टर में कमरों के किराए रू7800 से बढ़कर रू10,000 तक पहुंच सकते हैं।
- निवेश के लाभ: यह क्षेत्र विविधता प्रदान करता है और पर्यटन में निरंतर वृद्धि के साथ दीर्घकालिक विकास की प्रबल संभावना रखता है।
- जोखिम और सावधानियां: होटल व्यवसाय अत्यधिक संवेदनशील है और मौसमी बदलावों से प्रभावित होता है। इसके अलावा, इस सेक्टर में परिचालन संबंधी जटिलताएं अधिक होती हैं, इसलिए सही प्रबंधन टीम का होना महत्वपूर्ण है।
- क्षेत्रीय विकास: Swadesh Darshan 2.0 और बेहतर हवाई कनेक्टिविटी के कारण, टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी होटल सेक्टर में भारी निवेश की संभावनाएं हैं।
ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी उद्योग में निवेश की नई लहर
देश के ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी उद्योग में संस्थागत पूंजी के निवेश की नई लहर दिख रही है। इससे इस क्षेत्र की जोरदार रफ्तार का पता चलता है। इस महीने की शुरुआत में लेमन ट्री होटल्स ने ऐलान किया था कि अमेरिका की बहुराष्ट्रीय निजी इक्विटी कंपनी वारबर्ग पिंकस उसकी सब्सिडियरी फ्लेर होटल्स के विकास पर 960 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। साथ ही वह डच पेंशन फंड एपीजी से फ्लेर होटल्स में 41.09 प्रतिशत हिस्सेदारी भी खरीदेगी।
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों ने नोट में कहा, ‘कुल मिलाकर हम इस सौदे को सकारात्मक रूप से देख रहे हैं क्योंकि इससे वारबर्ग पिंकस फिर से पूंजी ला रही है और यह पूंजी इस बार फ्लेर के जरिए आ रही है। उनकी मौजूदगी ऑरिका नेहरू प्लेस जैसे भविष्य के बड़े स्तर वाले पूंजीगत व्यय का जोखिम कम करती है और फ्लेर की सूचीबद्धता के लिए सहज रास्ता सुनिश्चित करती है।’
हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की परिसंपत्ति निर्माण करने वाली कंपनी शैले होटल्स के मुख्य परिचालन अधिकारी गौरव सिंह ने कहा, ‘व्यावहारिक रूप से संस्थागत पूंजी परिसपत्ति स्वामित्व और परिचालन प्लेटफार्मों के बीच स्पष्ट अंतर को सक्षम बनाती है, जिससे स्थापित परिचालकों को बैलेंस शीट पर अधिक दबाव डाले बिना भौगोलिक रूप से विस्तार करने की अनुमति मिलती है।’

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