April 13, 2026

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India’s Higher Education : अगले एक दशक में होगा 100 अरब डॉलर का निवेश!

बड़े इंस्टीट्यूशनल रियल एस्टेट के लिए मौके ही मौके 

उड़ान डेस्क। भारत का उच्च शिक्षा क्षेत्र अगले दशक में दुनिया के सबसे बड़े संस्थागत रियल एस्टेट अवसरों में से एक बनने जा रहा है, जिसमें नए कैंपस के लिए बड़े पैमाने पर भूमि की आवश्यकता होगी। ANAROCK कैपिटल की रिपोर्ट ‘The Academic Real Estate Supercycle’ में यह संकेत दिया गया है कि बढ़ते छात्र नामांकन, नीति परिवर्तन और वैश्वीकरण के कारण इस क्षेत्र में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।

हायर एजुकेशन में बड़े निवेश की जरूरत

ANAROCK कैपिटल की रिपोर्ट ‘द एकेडमिक रियल एस्टेट सुपरसाइकिल’ के मुताबिक भारत का उच्च शिक्षा क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े इंस्टीट्यूशनल रियल एस्टेट मौकों में उभर रहा है। ANAROCK कैपिटल के सीईओ शोभित अग्रवाल कहते हैं कि भारत में उच्च-शिक्षा में नामांकन 2010-11 में 270 लाख से बढ़कर 2022-23 में 450 लाख हो गया है, जो शक्तिशाली जनसांख्यिकीय तत्वों और बढ़ती घरेलू आकांक्षाओं का परिणाम है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का लक्ष्य 2035 तक 50 फीसदी ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) प्राप्त करना है, जिसके लिए लगभग 250 लाख अतिरिक्त सीटों की आवश्यकता होगी। जिसमें 2.7 अरब वर्ग फुट अकादमिक बुनियादी ढांचा और 30,000 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी।

इस मांग को पूरा करने के लिए केवल अकादमिक सुविधाओं के निर्माण के लिए लगभग 100 अरब डॉलर का निवेश आवश्यक होगा, जिसमें भूमि अधिग्रहण और छात्र आवासीय बुनियादी ढांचे को शामिल नहीं किया गया है। हमें विश्वास है कि 2026 के केंद्रीय बजट में पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप बनाने के लिए प्रस्तावित सहायता अकादमिक बुनियादी ढांचे में अंतर को पहचानने का संकेत है।

हायर एजुकेशन में छात्राओं के नामांकन में तेज वृद्धि

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का उच्च शिक्षा क्षेत्र अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। देश ने अपनी उच्च-माध्यमिक (XI+XII) शिक्षा प्रणाली में तेजी से वृद्धि देखी है और इसका नामांकन प्रतिशत 2010-11 में 19.5 फीसदी से बढ़कर 2021-22 में 62.3 फीसदी हो गया है। खासतौर पर लड़कियों में यह वृद्धि ज्यादा रही है, जिनका नामांकन प्रतिशत 2001-02 में 19.8 फीसदी से बढ़कर 2021-22 में 66 फीसदी हो गया है, जो लड़कों के नामांकन प्रतिशत में वृद्धि की तुलना में ज्यादा है।

इस संरचनात्मक मांग को सहारा देने के लिए भारत की क्षमता में विस्तार हुआ है, जिससे विश्वविद्यालयों की संख्या 2015 में 760 से बढ़कर 2025 में 1,338 हो गई है, जबकि उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) की कुल संख्या 51,534 से बढ़कर 70,018 हो गई है। हालांकि, वर्तमान बुनियादी ढांचा नीतिगत लक्ष्यों और जनसांख्यिकीय वृद्धि को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए खुले दरवाजे

भारत द्वारा किए गए कुछ महत्वपूर्ण नियामक बदलावों के देश विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए खुल गया है। ANAROCK कैपिटल में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (इंवेस्टमेंट एडवाइजर) आशीष अग्रवाल कहते हैं, ‘2023 में विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान ( FHEI) विनियमन के तहत जो शीर्ष रैंक वाले वैश्विक विश्वविद्यालयों को भारत में स्वतंत्र परिसरों की स्थापना करने की अनुमति देते हैं, अब वे अपनी डिग्रियां, पूरी अकादमिक स्वायत्तता और UGC के निरीक्षण के तहत संचालन कर सकते हैं। अब शीर्ष 500 वैश्विक रैंकिंग वाले विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान भारतीय विश्वविद्यालयों से जुड़ने के बिना अपने परिसरों की स्थापना कर सकते हैं, बशर्ते वे अपनी वित्तीय क्षमता प्रदर्शित करें और आवश्यक भौतिक बुनियादी ढांचा तैयार करें।’

तीन वैश्विक विश्वविद्यालयों जिनमें Southampton, Wollongong, और Deakin (यूके और ऑस्ट्रेलिया से) शामिल हैं, ने पहले ही भारत में अपने संचालन शुरू कर दिए हैं। अग्रवाल ने कहा कि इसके अलावा 13 और संस्थानों ने अपनी आगामी शाखाओं की घोषणा की है, जिनमें Lancaster (यूके), Liverpool (यूके), Illinois Institute of Technology (यूएस), और Instituto Europeo di Design (इटली) शामिल हैं, जो भारत के शिक्षा बाजार में मजबूत अंतरराष्ट्रीय विश्वास को दर्शाते हैं।

राज्यों ने भी दी रियायतें

कई राज्य सरकारों ने उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए रियायतें दी हैं। उत्तर प्रदेश ने उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए स्टांप ड्यूटी में छूट और पूंजी सब्सिडी की घोषणा की है। गुजरात के GIFT सिटी ने साझा अकादमिक बुनियादी ढांचे के साथ एक समर्पित अंतरराष्ट्रीय कैम्पस फ्रेमवर्क तैयार किया है। महाराष्ट्र ने अपनी रणनीति को नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास 250 एकड़ के ‘एड्यूसिटी’ पर केंद्रित किया है, जहां पांच विदेशी उच्च-शिक्षा संस्थानों से प्रतिबद्धताएं प्राप्त की गई हैं।

भारत का वैश्विक छात्र बाजार में महज 1% हिस्सा

शायद अब यह भारत का समय है, जब वैश्विक शिक्षा के बाजार का एक बड़ा हिस्सा देश के भीतर स्थित हो। वर्तमान में 13.4 लाख भारतीय छात्र विदेशों में अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन भारत के पास शिक्षा का सबसे बड़ा इकोसिस्टम होने के बावजूद वह सिर्फ 1 फीसदी वैश्विक छात्र बाजार को ही आकर्षित करता है। केवल 11 भारतीय संस्थान वैश्विक टॉप 500 विश्वविद्यालय रैंकिंग में शामिल हैं, जबकि अमेरिका (74), यूके (48), ऑस्ट्रेलिया (28) और कनाडा (19) के पास इससे कहीं अधिक संस्थान हैं।

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