आप सोच रहे होंगे की पानी पीने से भला कोई बीमार कैसे हो सकता है, बात सही भी है। हम सब जानते हैं कि जल ही जीवन है, लेकिन आयुर्वेद कहता है कि पानी पीने का तरीका, पानी पीने की मात्रा से ज्यादा महत्वपूर्ण है। गलत तरीके से पिया गया पानी शरीर को फायदा देने के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है। इसे नजरअंदाज करना कई बार भारी पड़ता है। आइए जानते हैं पानी पीने का सही तरीका…
खड़े होकर पानी पीने के नुकसान
अक्सर हम जल्दबाजी में खड़े होकर बोतल से गट-गट पानी पीते हैं। जब आप खड़े होकर पानी पीते हैं, तो पानी बिना फिल्टर हुए तेजी से नीचे जाता है। इसका सीधा असर किडनी और मूत्राशय पर पड़ता है। इससे किडनी पर अनावश्यक दबाव बनता है और शरीर से विषाक्त पदार्थ पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाते।
जोड़ों के दर्द और पानी का कनेक्शन
शायद आपको यकीन न हो, लेकिन घुटनों और जोड़ों के दर्द का एक बड़ा कारण गलत तरीके से पानी पीना है। खड़े होकर तेजी से पानी पीने से शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन (Fluid Balance) बिगड़ता है। इससे जोड़ों में मौजूद लुब्रिकेंट पर असर पड़ता है, जो आगे चलकर जोड़ों के दर्द या गठिया का कारण बन सकता है।
देसी सुधार के तरीके
पानी हमेशा बैठकर और घूंट-घूंट करके पिएं, बिल्कुल वैसे जैसे आप गर्म चाय पीते हैं। इससे मुंह की लार पानी के साथ मिलकर पेट में जाती है, जो पेट की एसिडिटी को शांत करती है। सुबह खाली पेट तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना पाचन तंत्र को साफ करने का सबसे पुराना और कारगर नुस्खा है।
निष्कर्ष
पानी शरीर की सबसे सस्ती और असरदार दवा है, लेकिन इसे दौड़कर नहीं, बल्कि रुककर और समझदारी से पिएं। पीने के तरीके में एक छोटा सा बदलाव आपको भविष्य की बड़ी बीमारियों से बचा सकता है।
(Disclaimer: यह जानकारी सामान्य जागरूकता और जीवनशैली सुधार के लिए है। किडनी या गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने पर डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लें।)

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