चंडीगढ़.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देश भर में 2011 टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टैट) ज़रूरी होने से पहले भर्ती हुए टीचरों को अब अपनी नौकरी बचाने टैट की परीक्षा पास करना अनिवार्य है। कई राज्यों ने परीक्षा ले भी ली है। वहीं, पंजाब इसके लिए कानूनी विकल्प की तलाश कर रहा है।
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस का कहना हैं, सरकार टीचरों के साथ खड़ी है। इसके लिए कानूनी विकल्प ढूंढे जा रहे हैं। क्योंकि इस फैसले के कारण पंजाब के 50 फीसदी स्कूलों में प्रिंसिपलों को नहीं लगाया जा सकता है। क्योंकि शिक्षकों की तरक्की प्रभावित हुई है। वहीं सीधी भर्ती पर भी प्रभाव पड़ा है। पंजाब भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरजोत बैंस ने कहा कि सरकार टैट परीक्षा करवाने के लिए तैयार है। इसे मार्च माह में करवाया जा सकता है। साथ की सरकार रिव्यू पिटीशन डालने के कानूनी प्रावधानों की भी तलाश कर रही है।
40 हजार के करीब टीचर प्रभावित
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से राज्य के 19,000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में काम कर रहे एक लाख से अधिक टीचरों में से करीब 40,000 टीचर प्रभावित होंगे। रिटायरमेंट से पहले जिनकी सर्विस पांच साल से कम बची है, उन्हें इससे छूट दी गई है। यह आदेश उन लोगों के प्रमोशन पर भी रोक लगाता है जो टेस्ट पास नहीं कर पाते हैं।
सरकार कानूनी विकलप ढूंढ रही
मंत्री ने कहा कि वह नहीं चाहते कि 20-25 साल से पढ़ाने वाले शिक्षकों की नौकरी जाए। इसलिए सरकार कानूनी विकल्प ढूंढ रही है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पहले पंजाब सरकार ने भी फरवरी माह में टैट की परीक्षा करवाने की तैयारी की थी लेकिन अब इसे मार्च माह में करवाया जा सकता है। बता दें कि कई राज्यों में टैट परीक्षा की प्रक्रिया या तो पूर्ण हो गई है या अंतिम चरण में हैं। बता दें कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक 2011 से पहले भर्ती हुए टीचरों को 31 अगस्त, 2027 तक यह टेस्ट पास करना होगा। अन्यथा उन्हें सेवा मुक्त कर दिया जाएगा।

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