March 25, 2026

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अप्रैल से जुलाई तक राहत ही राहत: यूपी के 40 करोड़ उपभोक्ताओं का बिजली बिल खुद-ब-खुद होगा कम

लखनऊ
विद्युत नियामक आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड को कास्ट डाटा बुक का उल्लंघन करने के मामले में उपभोक्ताओं का पैसा वापस करने के निर्देश दिए हैं। निर्देशों में उल्लेख किया गया है कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के करीब एक लाख उपभोक्ताओं का 40 करोड रुपए वापस किया जाए। यह धनराशि बिजली विभाग को अप्रैल 2026 से जुलाई 2026 के बिजली बिलों में समायोजित करनी होगी l

बिजली विभाग ने कास्ट डाटा बुक की अनदेखी करते हुए बिजली उपभोक्ताओं से कनेक्शन का निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क लिया था। इस पूरे मामले को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और केंद्र व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया था।

अधिक पैसा देने वाले उपभोक्ता भी इससे अंजान थे। मामला आयोग पहुंचा तो उपभोक्ताओं ने भी बिजली विभाग द्वारा अधिक कनेक्शन शुल्क लेने पर नाराजगी जताई थी। विद्युत नियामक आयोग में मामले की सुनवाई कई महीनों से चल रही थी इस पर विद्युत नियामक आयोग ने बिजली विभाग को निर्देश दिए हैं कि कास्ट डाटा बुक के हिसाब से ही कनेक्शन शुल्क लिया जाए।

कनेक्शन शुल्क के मुताबिक बिजली विभाग को सिंगल फेस का 2800 रुपये लेना चाहिए लेकिन बिजली विभाग के अभियंताओं ने 6,016 रुपए लिए। l इसी तरह थ्री फेस का 4,100 लेना चाहिए लेकिन बिजली विभाग ने 11,341 रुपए लिए। इस संबंध में बिजली अभियंताओं का तर्क है कि जो कंप्यूटर पर धनराशि आती है, वही अभियंता व काउंटर पर बैठा कर्मी काटता है। उसमें फेरबदल उच्च स्तर पर ही हो सकता है। इसमें अभियंता की कोई गलती नहीं है। वहीं बिजली विभाग अधिक कनेक्शन धनराशि देने वाले उपभोक्ता को शेष धनराशि बिल में समायोजित करेगी। वर्मा के मुताबिक इससे पहले भी बिजली विभाग ने कास्ट डाटा बुक के नियमों की अनदेखी की थी, तब बिजली विभाग को एक करोड़ 75 लाख रुपये वापस करने पड़े थे।

क्या है कास्ट डाटा बुक
कष्ट डाटा बुक में बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं से जो बिजली के अलग-अलग मद का शुल्क लिया जाता है उसका उल्लेख होता है। इससे अतिरिक्त बिजली विभाग नहीं ले सकता। यह कास्ट डाटा बुक विद्युत नियामक आयोग द्वारा अभियंताओं व उपभोक्ताओं की आपत्तियां सुनने के बाद तैयार की जाती है। उसके आधार पर ही पूरे उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं से हर मद का शुल्क लेने का नियम है।

 

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