उड़ान न्यूज डेस्क। भारत के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने शनिवार 31 जनवरी को एक खास ‘CHAKRA’ (Center of Excellence for Financing Sunrise Sectors) नामक एक मेगा प्लान या सेंटर ऑफ एक्सीलेंस लॉन्च किया है। यह सेंटर उन सेक्टर्स के फाइनेंसिंग पर पूरा ध्यान देगा जो भारत के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसका उद्देश्य भारत के तकनीकी-आधारित और टिकाऊ (Sustainable) भविष्य को आकार देने वाले आठ प्रमुख ‘सनराइज सेक्टर’ (उभरते क्षेत्र) को विशेष वित्तपोषण (Financing) और सहायता प्रदान करना है। इस प्लान को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के अनुरूप डिज़ाइन किया गया है।
इनमें रिन्यूएबल एनर्जी, एडवांस्ड सेल केमिस्ट्री और बैटरी स्टोरेज, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, डीकार्बोनाइजेशन, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। SBI का मानना है कि ये सेक्टर मिलकर अगले पांच साल में करीब 100 लाख करोड़ रुपए का बड़ा मौका पैदा कर सकते हैं। ये भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाने वाले हैं।
20-22 लाख करोड़ का लोन का अनुमान
इस मेगा प्लान की जानकारी देते हुए, SBI के चेयरमैन सी एस सेट्टी ने बताया कि इन सेक्टर्स में सिर्फ कर्ज से काम नहीं चलेगा। बैंक ने इन क्षेत्रों में अगले पांच साल के लिए 20 से 22 लाख करोड़ रुपए तक का लोन देने का मौका देखा है। उन्होंने कहा कि बैंक इन सेक्टर्स के फाइनेंसिंग से जुड़ी पॉलिसी बनाने में भी हिस्सा ले रहा है। नए जोखिम, उभरती टेक्नोलॉजी और लंबे समय तक चलने वाले कैपिटल स्ट्रक्चर पर फोकस है। सिर्फ सामान्य लोन नहीं, बल्कि मेजेनाइन फाइनेंसिंग या दूसरे तरीकों से भी फंडिंग की सोच है।
21 फाइनेंशियल संस्थानों के साथ समझौते
इसके लिए SBI ने 21 फाइनेंशियल संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। इन एमओयू के तहत उनकी प्रोजेक्ट फाइनेंस टीमें CHAKRA में SBI की टीम के साथ मिलकर काम करेंगी। इससे सबकी क्षमता बढ़ेगी और साथ में प्रोजेक्ट फाइनेंस करना आसान हो जाएगा। जापानी बैंक जैसे SMBC और MFG इसमें शामिल हो चुके हैं। भारत में PFC, REC, NaBFID जैसे सरकारी संस्थान भी साथ हैं। सेट्टी ने बताया कि यूरोपीय और अमेरिकी बैंकों से भी बातचीत चल रही है। जापानी बैंकों को भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और इन नए सेक्टर्स की लंबे समय से समझ है, इसलिए उनके साथ जुड़ना फायदेमंद लग रहा है।
सेट्टी ने यह भी कहा कि आज बैंक डिपॉजिट से प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग कर पा रहे हैं क्योंकि सेविंग्स और टर्म डिपॉजिट काफी स्थिर हैं। लेकिन अब घरेलू बचत दूसरे चैनलों में भी जा रही है। इसलिए इंफ्रास्ट्रक्चर और सनराइज सेक्टर्स में दूसरे निवेशकों को लाना जरूरी है। इसके लिए निवेशकों में भरोसा पैदा करना पड़ेगा।
CHAKRA से क्या मिलेगा फायदा?
CHAKRA से व्हाइट पेपर, सेक्टर रिपोर्ट, नॉलेज प्रोग्राम, इंडस्ट्री मीटिंग और पॉलिसी चर्चा जैसे काम होंगे। इससे क्लाइंट, निवेशक और नीति बनाने वाले लोगों को सही फैसले लेने में मदद मिलेगी। यह सेंटर डेवलपमेंट फाइनेंस संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, बैंकों, एनबीएफसी, इंडस्ट्री ग्रुप, कंपनियों, स्टार्टअप्स, यूनिवर्सिटी और थिंक टैंक्स के साथ मिलकर काम करेगा। SBI का लक्ष्य इन सेक्टर्स में कैपिटल का बेहतर बहाव बनाना, नई इनोवेशन वाली कंपनियों को सपोर्ट करना और भारत के सस्टेनेबल व टेक्नोलॉजी आधारित विकास को मजबूत करना है। यह कदम बैंक के MSME सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बाद उठाया गया है।
SBI के ‘चक्र’ (CHAKRA) से जुड़ी मुख्य बातें
- उद्देश्य (Objective): विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप, इन पूंजी-गहन (capital-intensive) क्षेत्रों में निवेश को आसान बनाना और जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना है।
- निवेश क्षमता: 2030 तक इन क्षेत्रों में 100 लाख करोड़ रुपए से अधिक के कुल पूंजी निवेश का अनुमान है, जिसके लिए बैंक सहायता प्रदान करेगा।
फोकस सेक्टर (8 प्रमुख क्षेत्र): ‘चक्र’ मुख्य रूप से इन आठ क्षेत्रों पर केंद्रित होगा
- नवीकरणीय ऊर्जा
- उन्नत सेल केमिस्ट्री और बैटरी स्टोरेज
- इलेक्ट्रिक मोबिलिटी
- ग्रीन हाइड्रोजन
- सेमीकंडक्टर
- कार्बन उत्सर्जन में कमी
- स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर
- डेटा सेंटर इन्फ्रास्ट्रक्चर।
कार्यप्रणाली: यह सिर्फ एक थिंक टैंक नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष वित्तपोषण (financing) करेगा। ‘चक्र’ नॉलेज शेयरिंग, प्रोजेक्ट इवैल्यूएशन, क्षमता निर्माण, व्हाइट पेपर्स, और सेक्टर रिपोर्ट्स के माध्यम से निर्णय लेने में मदद करेगा।
साझेदारी: यह केंद्र विकास वित्त संस्थानों, बहुपक्षीय एजेंसियों, बैंकों, एनबीएफसी, उद्योग निकायों, स्टार्ट-अप और अकादमिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगा।
महत्व: एसबीआई के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेत्ती के अनुसार, ‘चक्र’ का लक्ष्य इन उभरते क्षेत्रों को समझने, विशिष्ट वित्तीय समाधान विकसित करने और भारत के सतत और तकनीक-आधारित भविष्य के लिए पूंजी का प्रवाह बढ़ाना है।

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