नई इंसेंटिव स्कीम लागू करने की तारीख आगे बढ़ी
उड़ान डेस्क। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री से जुड़े डिस्ट्रीब्यूटर्स को सेबी ने बड़ी राहत दी है। बाजार नियामक सेबी ने नए इंसेंटिव ढांचे को लागू करने की तारीख एक महीने आगे बढ़ा दी है। अब यह व्यवस्था 1 मार्च 2026 से लागू होगी, पहले इसे 1 फरवरी 2026 से लागू किया जाना था। इस फैसले का सीधा फायदा उन म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स को मिलेगा, जो छोटे शहरों और नए निवेशकों तक म्यूचुअल फंड को पहुंचाने में जुटे हैं।
किन पर लागू है नया इंसेंटिव
सेबी का यह अतिरिक्त इंसेंटिव ढांचा खास तौर पर दो तरह के नए निवेशकों को जोड़ने पर फोकस करता है। पहला, बी-30 शहरों से आने वाले नए व्यक्तिगत निवेशक और दूसरा, देश के किसी भी शहर से आने वाली नई महिला निवेशक। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में बी-30 का मतलब टॉप 30 बड़े शहरों से बाहर के इलाके होते हैं। इन शहरों और कस्बों में अभी भी म्यूचुअल फंड की पहुंच सीमित मानी जाती है।
क्यों बढ़ाई गई डेडलाइन
सेबी को इंडस्ट्री से लगातार फीडबैक मिल रहा था कि नए इंसेंटिव सिस्टम को लागू करने के लिए जरूरी टेक्निकल सिस्टम और प्रोसेस तैयार करने में दिक्कतें आ रही हैं। कई एएमसी और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कहा कि तय समय में इसे सुचारु रूप से लागू करना मुश्किल होगा। इन्हीं ऑपरेशनल चुनौतियों को देखते हुए सेबी ने फैसला किया कि सभी को तैयारी के लिए और समय दिया जाए। इसी वजह से लागू करने की तारीख अब 1 मार्च 2026 कर दी गई है।
डिस्ट्रीब्यूटर्स को कितना मिलेगा इंसेंटिव
नए फ्रेमवर्क के तहत, अगर कोई म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर किसी नए निवेशक को जोड़ता है, तो एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) उसे अतिरिक्त कमीशन देगी। यह कमीशन पहली बार किए गए लंपसम निवेश या पहले साल की एसआईपी (SIP) की कुल रकम का 1 प्रतिशत होगा। हालांकि इसकी अधिकतम सीमा 2,000 रुपए रखी गई है। शर्त यह है कि निवेशक कम से कम एक साल तक निवेश में बना रहे।
पैसा कहां से आएगा ?
यह अतिरिक्त कमीशन एएमसी के उस फंड से दिया जाएगा, जो पहले से ही निवेशक जागरूकता के लिए तय किया गया है। यह रकम 2 बेसिस प्वाइंट्स से आएगी और यह मौजूदा ट्रेल कमीशन के अलावा दी जाएगी। यानि डिस्ट्रीब्यूटर्स की मौजूदा कमाई पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा, बल्कि उन्हें अतिरिक्त फायदा मिलेगा।
किन स्कीम्स पर नहीं मिलेगा फायदा
सेबी ने साफ किया है कि यह अतिरिक्त इंसेंटिव हर स्कीम पर लागू नहीं होगा। ईटीएफ, कुछ खास फंड ऑफ फंड्स और बहुत कम अवधि वाली स्कीम्स जैसे ओवरनाइट, लिक्विड, अल्ट्रा-शॉर्ट और लो-ड्यूरेशन फंड्स को इससे बाहर रखा गया है। इसके अलावा, अगर कोई महिला निवेशक बी-30 शहर से आती है, तो उस पर ड्यूल इंसेंटिव नहीं मिलेगा। यानी एक ही निवेशक के लिए दो बार अतिरिक्त कमीशन नहीं दिया जाएगा।
सेबी ने क्या कहा ?
सेबी ने पहले जारी अपने बयान में साफ शब्दों में कहा था, “म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स नए व्यक्तिगत निवेशकों को लाने पर अतिरिक्त कमीशन के हकदार होंगे। इसमें बी-30 शहरों से आने वाले नए निवेशक और टॉप 30 व बी-30 दोनों तरह के शहरों से आने वाली नई महिला निवेशक शामिल होंगी।”
पहले भी बदला गया था फ्रेमवर्क
यह पहली बार नहीं है जब सेबी ने इस इंसेंटिव ढांचे में बदलाव किया है। पहले भी बी-30 शहरों से निवेश बढ़ाने के लिए एक व्यवस्था लाई गई थी, लेकिन इंडस्ट्री से इसके गलत इस्तेमाल की आशंका जताई गई थी। इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सेबी ने अब नया और ज्यादा साफ-सुथरा इंसेंटिव सिस्टम तैयार किया है, ताकि वाकई नए निवेशक म्यूचुअल फंड से जुड़ें और सिस्टम का गलत इस्तेमाल न हो।

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