उड़ान डेस्क। आज की आधुनिक जीवनशैली में लंबे समय तक बैठना एक आम आदत बन चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत सिगरेट पीने से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है. ऑफिस में कंप्यूटर के सामने घंटों बैठकर काम करना, ऑनलाइन मीटिंग्स, मोबाइल स्क्रॉल करना और टीवी देखना अब रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा है. लोग यह मान लेते हैं कि अगर वे धूम्रपान नहीं करते और कभी-कभार एक्सरसाइज कर लेते हैं तो वे सुरक्षित हैं, जबकि मेडिकल रिसर्च बताती है कि लंबे समय तक लगातार बैठना शरीर के लिए एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करता है, जो धीरे-धीरे कई गंभीर बीमारियों को जन्म देता है.
समय से पहले मृत्यु का खतरा
डॉ. सुमोल रत्ना (सहायक प्रोफेसर, चिकित्सा विभाग, एनआईआईएमएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, ग्रेटर नोएडा) ने बताया कि लंबे समय तक बैठने से शरीर की मांसपेशियां निष्क्रिय हो जाती हैं और मेटाबॉलिज्म की गति धीमी पड़ जाती है. जब शरीर ज्यादा देर तक हिलता-डुलता नहीं है तो कैलोरी बर्न कम होती है और शरीर में फैट जमा होने लगता है. साथ ही ब्लड सर्कुलेशन भी प्रभावित होता है, जिससे ऑक्सीजन और पोषक तत्व शरीर के अंगों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाते. एक्सपर्ट्स का कहना है कि रोजाना 7 से 9 घंटे या उससे ज्यादा समय तक बैठे रहने वाले लोगों में समय से पहले मृत्यु का खतरा उन लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा होता है, जो दिनभर सक्रिय रहते हैं.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक बैठने से शरीर के कई अंग प्रभावित होते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान दिल यानी हृदय को पहुंचता है, जब व्यक्ति लंबे समय तक बैठा रहता है तो ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है और धमनियों में फैट जमा होने लगता है. इससे दिल की धमनियां सख्त हो जाती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है. यह स्थिति हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ा देती है. रिसर्च में यह सामने आया है कि लंबे समय तक बैठने वाले लोगों में हृदय रोग का खतरा 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, भले ही वे नियमित रूप से सिगरेट न पीते हों.
रीढ़ की हड्डी पर गहरा असर
दिल के अलावा लंबे समय तक बैठने से रीढ़ की हड्डी और कमर पर भी गहरा असर पड़ता है. गलत पोस्चर में घंटों बैठने से रीढ़ की प्राकृतिक बनावट बिगड़ने लगती है और गर्दन, कंधों व पीठ में लगातार दर्द की समस्या पैदा हो जाती है. आज कम उम्र के लोगों में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, स्लिप डिस्क और लोअर बैक पेन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनकी एक बड़ी वजह लंबे समय तक बैठकर काम करना है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि लगातार बैठने से रीढ़ पर दबाव बढ़ता है और नसों में खिंचाव आता है, जिससे दर्द और जकड़न की समस्या बनती है.
पाचन तंत्र के लिए भी नुकसानदेह
लंबे समय तक बैठना पाचन तंत्र के लिए भी नुकसानदायक माना जाता है, जब शरीर ज्यादा देर तक एक ही स्थिति में रहता है, तो आंतों की गतिविधि धीमी हो जाती है, जिससे कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. इसके साथ ही पेट के आसपास चर्बी तेजी से जमा होने लगती है, जिससे मोटापा बढ़ता है. डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक बैठने वाले लोगों में फैटी लिवर की समस्या का खतरा भी ज्यादा होता है, जो आगे चलकर लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.
मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर
मानसिक स्वास्थ्य पर भी लंबे समय तक बैठने का नकारात्मक असर पड़ता है. शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन और ताजा खून नहीं पहुंच पाता, जिससे व्यक्ति सुस्ती, चिड़चिड़ापन और मानसिक थकान महसूस करने लगता है. कई स्टडीज में यह पाया गया है कि लंबे समय तक बैठने वाले लोगों में तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन का खतरा अधिक होता है. इसके अलावा एकाग्रता में कमी और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं, जो कामकाज और व्यक्तिगत जीवन दोनों को प्रभावित करती हैं.
लंबे समय तक बैठने को टाइप-2 डायबिटीज का भी बड़ा कारण माना जा रहा है. एक्सपर्ट्स के अनुसार जब व्यक्ति लंबे समय तक निष्क्रिय रहता है, तो शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी कम हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है, यह स्थिति धीरे-धीरे डायबिटीज में बदल सकती है. कई रिसर्च में यह सामने आया है कि जो लोग दिन में ज्यादा समय बैठकर बिताते हैं, उनमें डायबिटीज का खतरा उन लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा होता है, जो नियमित रूप से चलते-फिरते रहते हैं.
जीवन की अवधि हो सकती है कम
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय तक बैठने की तुलना सिगरेट से इसलिए करते हैं क्योंकि इसका असर धीरे-धीरे लेकिन गहराई से शरीर को नुकसान पहुंचाता है. सिगरेट का नुकसान तुरंत समझ में आ जाता है, लेकिन बैठने से होने वाला नुकसान लंबे समय तक नजर नहीं आता और जब तक लक्षण सामने आते हैं, तब तक शरीर अंदर से कमजोर हो चुका होता है. कुछ अध्ययनों में यह भी कहा गया है कि रोजाना 6 से 8 घंटे से ज्यादा बैठने से जीवन की औसत अवधि 3 से 5 साल तक कम हो सकती है.
छोटे सुधार से बचाव संभव
अच्छी बात यह है कि लंबे समय तक बैठने से होने वाले नुकसान से बचाव संभव है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके लिए बहुत बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की आदतों में छोटे-छोटे सुधार काफी हैं. हर 30 से 40 मिनट में उठकर थोड़ा चलना, स्ट्रेचिंग करना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और कॉल पर बात करते समय खड़े रहना जैसी आदतें शरीर को सक्रिय रख सकती हैं. इसके अलावा नियमित एक्सरसाइज और वीकेंड पर फिजिकल एक्टिविटी भी लंबे समय तक बैठने के दुष्प्रभाव को कम करने में मदद करती है.
लंबे समय तक बैठना आज की जीवनशैली की सबसे खतरनाक लेकिन सबसे ज्यादा नजरअंदाज की जाने वाली आदतों में से एक बन चुका है. यह दिल, रीढ़, पाचन तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य सभी पर गंभीर असर डालता है, जिसमें सबसे ज्यादा खतरा हृदय को होता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो सिगरेट से दूरी बनाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है लंबे समय तक बैठने की आदत से बाहर निकलना. याद रखना चाहिए कि हमारा शरीर चलने और सक्रिय रहने के लिए बना है, न कि घंटों कुर्सी पर जमे रहने के लिए.

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