February 26, 2026

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स्टार्टअप से समाजसेवा : मानवता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं सुरिंदर

महज एक रुपए में जरुरतमंदों को देते हैं कपड़े

उड़ान डेस्क। उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद में एक ऐसा कपड़ा बैंक है, जहां से कोई भी जरुरतमंद महज एक रुपए देकर अपने लिए कपड़े खरीद सकता है। खासकर बच्चों को यहां एक रुपए के बदले नई यूनिफॉर्म मिल जाती है। समाजसेवा और मानवता की यह मिसाल पेश कर रहे हैं राजनगर एक्सटेंशन के रईसपुर के किसान चौधरी सुरिंदर, जिन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक कपड़ा बैंक की शुरुआत की है। जरुरतमंदों की मदद के लिए वे अपने स्टार्टअप का पांच फीसदी खर्च इसी कपड़ा बैंक में कर रहे हैं।

इस सोच से लेते हैं एक रुपए

सुरिंदर कहते हैं कि, उनका उद्देश्य पहले तो नि:शुल्क कपड़े देने का था, लेकिन लोग इसे भीख न समझें, इसलिए उन्होंने सेवा के बदले महज 1 रुपए लेना तय किया है। बैंक से जरूरतमंद बच्चे पूरे आत्मसम्मान और गरिमा के साथ कपड़े खरीदते हैं। इसका मकसद सिर्फ कपड़ों की व्यवस्था करना ही नहीं है, बल्कि सम्मान, बराबरी और आत्मविश्वास को मजबूत करने की पहल भी है।

कठिन संघर्षों से गुजरे हैं सुरिंदर

सुरिंदर बताते हैं कि उन्होंने कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बीच बमुश्किल सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की है। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के दौरान परिवार को भारी संघर्षों से होकर गुजरना पड़ा। उनके माता-पिता ने पशुपालन कर दूध-घी बेचा और उनकी पढ़ाई के लिए फीस जुटाई। इन संघर्षों ने ही सुरिंदर को इस काम के लिए प्रेरित किया। आज वे पूरे सम्मान के साथ यह काम कर रहे हैं और इसके लिए उन्हें लोगों का पूरा मान-सम्मान मिल रहा है।

बच्चों के लिए यूनिफॉर्म

दोस्त दीपक, सतेंद्र, रोहित, प्रिंस, सूरज, सुमित, मोनू, अर्जुन, संदीप आदि के साथ इस सेवा को शुरू करने वाले सुरिंदर के कपड़ा बैंक में फिलहाल 1000 बच्चों के लिए पूरी ड्रेस उपलब्ध है। यह भी तय किया कि कोई आवश्यकता से अधिक वस्तुएं न लें। इसके लिए उन्होंने कुछ नियम भी तय किए हैं और उसके मुताबिक ही वे जरुरतमंदों को कपड़े देते हैं।

स्टार्टअप का पांच फीसदी करते हैं खर्च

सुरिंदर बताते हैं कि इस कपड़ा बैंक पर वह अपने स्टार्टअप/FPO आत्मनिर्भर भारत मार्ट (यूनिट दूध-घी, मसाले, आटा, मिलेट्स आटा, बेसन, सरसों का तेल, शहद) से अर्जित आय का 5 प्रतिशत खर्च करते हैं और इसी से यह बैंक संचालित होता है। अब तक सैंकड़ों जरुरतमंद बच्चे उनके इस कपड़ा बैंक से लाभान्वित हो चुके हैं।

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