March 25, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

सत्ता की चिंता छोड़ें, सही निर्णय लें – सुप्रीम कोर्ट की जज की दो टूक

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट जज बीवी नागरत्ना ने न्यायाधीशों को अपने फैसले पर अड़े रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि किसी भी दबाव में सही फैसला लेने से संकोच नहीं करना चाहिए। वह केरल उच्च न्यायालय में आयोजित दूसरे टीएस कृष्णमूर्ति अय्यर मेमोरियल लेक्चर में बोल रहीं थीं। इससे पहले उन्होंने मीडिया को लेकर भी ऐसी ही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि किसी भी तरह की बाधा, भय या प्रभाव में मीडिया अपनी भूमिका नहीं निभा सकता है।

मंगलवार को जस्टिस नागरत्ना ने कहा, 'जजों को सही फैसला लेने से संकोच नहीं करना चाहिए। फिर चाहे इसकी वजह से उनकी उन्नति ही क्यों न रुक जाए या सत्ता में बैठे लोग नाराज हो जाएं।' उन्होंने कहा, 'एक जज को राजनीतिक दबाव, संस्थागत धमकी या पॉपुलर डिमांड से मुक्त ही रहना चाहिए।'

मीडिया को लेकर क्या बोलीं
शुक्रवार को जस्टिस नागरत्ना आईपीआई इंडिया अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म 2025 के सम्मान समारोह में पहुंचीं थीं। उन्होंने कहा था कि प्रेस पर कब्जा करने के हालिया प्रयासों के पीछे न केवल आर्थिक आधार हैं बल्कि राजनीतिक पहलू भी शामिल हैं। खास बात है कि जस्टिस नागरत्ना सितंबर 2027 में भारत की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश बनेंगी।

जस्टिस नागरत्ना ने शुक्रवार को साफ तौर पर कहा कि मीडिया अपना काम ठीक से तभी कर सकता है जब वह किसी भी तरह के डर या दबाव से मुक्त हो। उन्होंने कहा कि आज के दौर में प्रेस की आादी को सबसे बड़ा खतरा सीधे तौर पर लगने वाली पाबंदियों (सेंसरशिप) से नहीं है। बल्कि, असली खतरा आर्थिक नीतियों, लाइसेंस देने के कड़े नियमों और मीडिया कंपनियों के मालिकाना हक से जुड़ा है।

उन्होंने कहा, 'एक मीडिया प्रतिष्ठान कानूनी रूप से सरकार की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हो सकता है, फिर भी आर्थिक रूप से इस तरह से मजबूर हो सकता है कि ऐसी आलोचना महंगी पड़ जाए।'

सर्वोच्च न्यायालय में इस समय एकमात्र महिला न्यायाधीश ने कहा कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की दिलचस्प संवैधानिक स्थिति है। उन्होंने कहा कि यह अधिकार अनुच्छेद 19(1)(ए) – भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(जी) – किसी भी पेशे से जुड़ने या किसी भी व्यवसाय, व्यापार या कारोबार को चलाने की स्वतंत्रता के बीच परस्पर क्रिया से उभरता है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति नागरत्ना ने बताया कि भारत में प्रेस की आज़ादी को संविधान दो अलग-अलग तरीकों से सुरक्षा देता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र मीडिया कितना जरूरी है।

 

Spread the love