April 13, 2026

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तालाबों को ‘निगल’ गया एयरपोर्ट, शर्त नए बनाने की थी, भूल गए अफसर

  • शहरी विकास के नाम पर पर्यावरण का विनाश : अधिग्रहण के बाद नए जलाशय बनाना था 
  • एनजीटी ने जताया एतराज : लापरवाही पर यमुना प्राधिकरण से मांगा जवाब

उड़ान न्यूज। शहरी विकास के नाम पर नियम शर्तों को दरकिनार कर प्राकृतिक संसाधनों को खत्म किया जा रहा है। कहीं हरियाली चौपट की जा रही है तो कहीं भू-खनन और जल संसाधनों को दफन किया जा रहा है। लिहाजा, पर्यावरणीय असंतुलन अब मानवीयता पर संकट बनकर डराने लगा है। ऐसा ही एक मामला नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ा हुआ है, जहां विकास के नाम पर जल स्त्रोत वाले आठ तालाबों को अफसर निगल गए। मामले को दबाने के भी प्रयास हुए, लेकिन पर्यावरण से जुड़े मामलों पर नजर रखने वाले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal) ने जवाब तलब कर अधिकारियों के मनसूबे पर पानी फेर दिया। इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए NGT ने यमुना प्राधिकरण से जवाब मांगा है।

अधिग्रहण की शर्तों में यह था शामिल

मामला, पुराना है लेकिन इस मसले को उठाना इसलिए जरुरी है, क्योंकि इसमें शामिल जिम्मेदार इसे दफनाने की फिराक में हैं। दरअसल, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विकास के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक बताए जाने के बाद भी यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के आठ तालाबों का अधिग्रहण किया गया था। इसमें नियम यह थाी कि इसके बदले में अधिग्रहित तालाबों के आकार से सवा गुना बड़ा तालाब विकसित किया जाएगा, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हुआ।

यह था पूरा मामला

मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, पर्यावरणविद् कुसुम गुप्ता ने साल 2022 में नोएडा जिले के गौतम बुद्ध नगर के 1031 तालाबों के अधिग्रहण और उनके जीर्णोद्धार को लेकर NGT में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि, उत्तरप्रदेश सरकार के वर्ष 2016 के दिशा-निर्देशों में यह प्रावधान किया गया था कि विकास कार्यों के लिए सरकार जमीनों के साथ तालाबों का अधिग्रहण भी कर सकती है। इसमें यह नियम व शर्तें रखी गईं थी कि अधिग्रहित तालाब के आकार से सवा गुना बड़ा तालाब विकसित किया जाएगा।

सर्वोच्च न्यायाल ने भी बताया था असंवैधानिक

ज्ञात हो कि, सर्वोच्च न्यायालय ने भी 2020 में अपने एक फैसले में इसे असंवैधानिक बताया था, इसके बाद भी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में आठ तालाबों का अधिग्रहण कर विकास कर लिया गया, लेकिन इसके एवज में नए तालाबों के निर्माण का अब तक कोई अता-पता नहीं है। अब जनवरी 2026 में इस मामले को लेकर एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। मामले में एनजीटी ने यमुना प्राधिकरण को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने के लिए अधिग्रहित किए गए तालाबों के विकास कार्यों की रिपोर्ट पेश करने के लिए आदेश दिए हैं।

वैकल्पि तालाब कहां बनाए, यह बताए प्राधिकरण

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्त लहजे में आदेश देते हुए पूछा है कि यमुना प्राधिकरण को यह बतना होगा कि एयरपोर्ट के लिए जिन तालाबों का अधिग्रहण किन शर्तों के मुताबिक किया गया था, यदि शर्त में नए जलाशय बनाने का प्रावधान था तो फिर वे अब तक क्यों नहीं बने,यदि वे बने हैं तो फिर कहां बनाए गए हैं, उनकी विस्तृत जानकारी दी जाए। एनजीटी ने तालाबों के विकास कार्यों की रपट चार हफ्ते में मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था यह हवाला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दिए गए उस हवाले का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि, स्थानीय जलाश्यों को खत्म करने की योजनाएं संविधान के सिद्धांतों के विपरीत हैं, भले ही उनके बदले में विकल्प दिए जाएं। ऐसी योजनाओं को रद्द किया जा सकता है या अन्य जगह तलाशी जा सकती है। एनजीटी के इस रुख और आदेश से अब विकास के नाम पर पर्यावरणीय मामलों में हस्तक्षेप को लेकर पर्यावरणविदें में अब कुछ उम्मीद जगी है।

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