April 11, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

अभी और बिगड़ेंगे हालात? अमेरिका-ईरान तनाव के बीच विश्व बैंक की गंभीर चेतावनी

नई दिल्‍ली.
अमेरिका और ईरान के बीच जंग ने दुनिया भर की हेडक बढ़ा दी है, क्‍योंकि तेल के दाम रिकॉर्ड उछले हैं और 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब बने हुए हैं। साथ ही दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट भी देखने को मिली है। भारत समेत कई देशों का आयात-निर्यात भी प्रभावित हो गया है। ऐसे में विश्‍व बैंक की ओर से एक बड़ी चेतावनी आई है। 

विश्व बैंक के प्रमुख अजय बंगा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अभी तो कुछ नहीं, युद्ध खत्‍म होने के बाद और बुरे हालात होने वाले हैं। जंग खत्‍म होने के बाद भी  नुकसान लंबे समय तक बना रह सकता है। उनका कहना है कि तत्‍काल और स्थायी युद्धविराम भी अर्थव्यवस्थाओं में व्यापक मंदी को नहीं रोक पाएगा। 

अगर युद्धविराम कायम रहता है, तो भी वैश्विक विकास में 0.3 से 0.4 प्रतिशत अंकों की गिरावट आ सकती है। अगर सीजफार फिर से टूट जाता है, तो गिरावट 1 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकती है, जिसका व्यापक प्रभाव व्यापार, ऊर्जा बाजारों और फाइनेंस सिस्‍टम पर पड़ेगा। 

उन्‍होंने कहा कि महंगाई का दबाव भी साथ-साथ बढ़ने की आशंका है। बंगा ने संकेत दिया कि युद्धविराम की स्थिति में ग्‍लोबल महंगाई 200 से 300 आधार अंकों तक बढ़ सकती है और अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसमें 0.9 फीसदी अंकों तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए स्थिति और भी गंभीर दिखती है, जहां सबसे खराब स्थिति में महंगाई 6.7% तक पहुंच सकती है। 

खतरे की चपेट में विकासशील देश
विश्व बैंक ने ऊर्जा आयात पर निर्भर द्वीप अर्थव्यवस्थाओं समेत संवेदनशील देशों के साथ संकटकालीन सहायता के माध्यम से इमरजेंसी फंड उपलब्ध कराने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। हालांकि, बंगा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकारों को ऐसी अस्थिर ऊर्जा सब्सिडी में नहीं फंसना चाहिए जो बाद में राजकोषीय अस्थिरता को पैदा कर दे। 

इसके विपरीत, उनका कहना है कि ऊर्जा में विविधता लाने में विफल रहने वाले देशों को लॉन्‍गटर्म आर्थिक अस्थिरता का खतरा रहता है। बंगा ने नाइजीरिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 20 अरब डॉलर की रिफाइनरी परियोजना ने घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है और यहां तक ​​कि पड़ोसी देशों को जेट ईंधन जैसे निर्यात को भी संभव बनाया है। 

बंगा ने इस बात पर जोर दिया कि लंबे समय समाधान वैकल्पिक ऊर्जा- परमाणु, जल, भूतापीय, पवन और सौर ऊर्जा – को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने में निहित है। इस बदलाव के बिना, देश पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर वापस लौट सकते हैं, जिससे आर्थिक और पर्यावरणीय जोखिम दोनों बढ़ जाएंगे। 

 

Spread the love