April 13, 2026

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श्रम बाजार में आएगी सुनामी! AI के कारण खत्म हो जाएंगी 40 फीसदी नौकरियां

IMF प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने दी चेतावनी

क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक वास्तव में नौकरियां खत्म कर देगा?  इसे लेकर ​चिंता जताई जा रहीं हैं। इससे काम आसान तो होंगे, लेकिन आशंका इस बात की है कि यह शिक्षित बेरोजगारी की दर में इजाफा करेगा। यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के कारण नौकरियों पर भविष्य में बड़े स्तर पर खतरा मंडराता दिख रहा है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी AI के कारण नौकरियों पर पड़ने वाले असर को लेकर चेतावनी दी है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, IMF प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि दुनियाभर में करीब 40 प्रतिशत नौकरियां AI से प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने इस बदलाव को श्रम बाजार में आने वाली सुनामी जैसा बताया है।

एंट्री-लेवल नौकरियों में सबसे ज्यादा असर
IMF प्रमुख ने कहा कि खास तौर पर एंट्री-लेवल यानी शुरुआती स्तर की नौकरियां ज्यादा खतरे में हैं, क्योंकि इन कामों को आसानी से ऑटोमेट किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि विकसित देशों में यह असर 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। हालांकि, भारत के लिए यह आंकड़ा लगभग 26 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके बावजूद युवाओं और नए ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी पाना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

भारत में अवसर भी और दबाव भी
भारत जैसे देश में हर साल लाखों युवा काम की तलाश में बाजार में उतरते हैं। ऐसे में AI के कारण नौकरी बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है। IMF प्रमुख ने कहा कि अगर सही नीतियां अपनाई जाएं तो AI भारत की अर्थव्यवस्था को फायदा भी दे सकता है। उनके मुताबिक, AI का सही इस्तेमाल देश की GDP में हर साल लगभग 0.7 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकता है।

युवाओं को खुद को बदलना होगा
जॉर्जीवा ने कहा कि सरकारों को शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करना होगा। सिर्फ नई स्किल्स सिखाना काफी नहीं है, बल्कि लोगों को बदलती तकनीक के साथ खुद को ढालना भी सीखना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि युवाओं को लचीला बनाना जरूरी है, ताकि वे नई परिस्थितियों में काम कर सकें। AI के साथ सर्विस सेक्टर में नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं, जिनका फायदा उठाया जा सकता है।

नीतियां और परस्पर सहयोग जरुरी
IMF प्रमुख ने कहा कि देश AI के सामने लाचार नहीं हैं, लेकिन सही नीतियां बनाना जरूरी है। उन्होंने देशों के बीच सहयोग और अनुभव साझा करने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, जो देश समय रहते तैयारी करेंगे, वे AI के प्रभाव को बेहतर तरीके से संभाल पाएंगे। भारत की डिजिटल पहचान, बैंकिंग सुधार और आर्थिक बदलाव की उन्होंने सराहना की और कहा कि इससे भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।

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