July 24, 2026

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युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं स्ट्रोक के मामले, जानिए इसके कारण, शुरुआती लक्षण और बचाव के असरदार तरीके

उड़ान डेस्क। कभी स्ट्रोक (Brain Stroke) को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में डॉक्टरों ने 30 से 45 वर्ष के लोगों में भी स्ट्रोक के मामलों में बढ़ोतरी देखी है। पहले जहां स्ट्रोक का खतरा मुख्य रूप से बुजुर्गों में माना जाता था, वहीं अब खराब जीवनशैली, बढ़ता तनाव, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और धूम्रपान जैसी आदतें युवाओं को भी इस गंभीर बीमारी की ओर धकेल रही हैं। चिकित्सकों का कहना है कि स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। यदि समय पर इलाज मिल जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है और स्थायी विकलांगता का खतरा भी काफी कम किया जा सकता है। इसलिए स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों की पहचान और जोखिम कारकों को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।

स्ट्रोक क्या होता है?
स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से तक रक्त की आपूर्ति अचानक रुक जाती है या मस्तिष्क की किसी रक्त वाहिका के फटने से रक्तस्राव होने लगता है। रक्त की कमी होने पर मस्तिष्क की कोशिकाएं ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिलने के कारण कुछ ही मिनटों में क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।

स्ट्रोक मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है-

1. इस्केमिक स्ट्रोक (Ischemic Stroke): यह सबसे सामान्य प्रकार है, जिसमें रक्त का थक्का (Blood Clot) मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली धमनी को बंद कर देता है।

2. हेमरेजिक स्ट्रोक (Hemorrhagic Stroke): इसमें मस्तिष्क की रक्त वाहिका फट जाती है और मस्तिष्क में रक्तस्राव होने लगता है। दोनों ही स्थितियां जानलेवा हो सकती हैं और इनमें तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है।

युवाओं में स्ट्रोक क्यों बढ़ रहा है?
डॉक्टरों का मानना है कि आज की बदलती जीवनशैली ने युवाओं में स्ट्रोक के खतरे को काफी बढ़ा दिया है।

1. हाई ब्लड प्रेशर उच्च रक्तचाप स्ट्रोक का सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है। कई युवाओं को यह पता ही नहीं होता कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है क्योंकि शुरुआती अवस्था में इसके लक्षण नहीं दिखते। लंबे समय तक अनियंत्रित हाई बीपी मस्तिष्क की धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है।

2. डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल का लगातार बढ़ा रहना धमनियों में वसा जमा होने का कारण बनता है। इससे रक्त प्रवाह बाधित हो सकता है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

3. धूम्रपान और तंबाकू सिगरेट, बीड़ी, वेपिंग और अन्य तंबाकू उत्पाद रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। निकोटीन रक्तचाप बढ़ाता है और रक्त के थक्के बनने की संभावना भी बढ़ा देता है।

4. शराब का अत्यधिक सेवन अधिक मात्रा में शराब पीने से हाई ब्लड प्रेशर, अनियमित हृदय गति और मोटापे का खतरा बढ़ता है, जो स्ट्रोक के प्रमुख कारण हैं।

5. मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता लंबे समय तक बैठे रहना, व्यायाम न करना और बढ़ता वजन स्ट्रोक के जोखिम को कई गुना बढ़ा सकता है। मोटापा अक्सर डायबिटीज और हाई बीपी जैसी बीमारियों से भी जुड़ा होता है।

6. तनाव और खराब नींद लगातार तनाव, देर रात तक जागना और पर्याप्त नींद न लेना शरीर के हार्मोनल संतुलन और हृदय स्वास्थ्य पर असर डालता है। समय के साथ यह स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकता है।

7. हृदय संबंधी बीमारियां कुछ लोगों में अनियमित धड़कन (Atrial Fibrillation), हृदय के वाल्व की बीमारी या जन्मजात हृदय दोष भी स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

  • चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा पड़ जाना।
  • एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन।
  • बोलने या शब्द समझने में परेशानी।
  • एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखाई देना।
  • संतुलन बिगड़ना या अचानक चक्कर आना।
  • बिना किसी कारण तेज सिरदर्द होना।
  • चलने में कठिनाई होना।

किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?

  • हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
  • डायबिटीज से पीड़ित लोग
  • मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति
  • धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करने वाले
  • अधिक शराब पीने वाले
  • हृदय रोगी
  • परिवार में स्ट्रोक का इतिहास रखने वाले लोग
  • लंबे समय तक तनाव में रहने वाले

क्या स्ट्रोक से बचाव संभव है?
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश मामलों में स्ट्रोक के जोखिम को कम किया जा सकता है।

  1. नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं : 40 वर्ष की उम्र का इंतजार न करें। यदि परिवार में हाई बीपी, डायबिटीज या हृदय रोग का इतिहास है, तो कम उम्र से ही नियमित जांच करानी चाहिए।
  2. ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें : यदि डॉक्टर ने दवा लिखी है तो उसे नियमित रूप से लें। बिना सलाह के दवा बंद न करें।
  3. संतुलित आहार लें : हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और कम नमक वाला भोजन लें। अधिक तला-भुना, प्रोसेस्ड और ट्रांस फैट युक्त भोजन कम करें।
  4. रोजाना व्यायाम करें : सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाला व्यायाम करें। तेज चलना, साइकिल चलाना, तैराकी और योग अच्छे विकल्प हो सकते हैं।
  5. धूम्रपान छोड़ें : तंबाकू छोड़ने के कुछ ही महीनों बाद स्ट्रोक का जोखिम कम होना शुरू हो जाता है।
  6. पर्याप्त नींद लें : हर दिन 7–9 घंटे की अच्छी नींद लेने की कोशिश करें। यदि लगातार खर्राटे आते हैं या नींद पूरी नहीं होती, तो डॉक्टर से सलाह लें।
  7. तनाव कम करें : योग, ध्यान, गहरी सांस लेने की तकनीक और परिवार के साथ समय बिताने जैसी आदतें मानसिक तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
यदि चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी आए, बोलने में परेशानी हो, देखने में दिक्कत हो या तेज सिरदर्द के साथ चक्कर आने लगे, तो इसे सामान्य कमजोरी या माइग्रेन समझकर नजरअंदाज न करें। स्ट्रोक में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। समय पर इलाज मिलने से मरीज के ठीक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

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