May 15, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

प्रेरणादायी हैं मां दुर्गा के नौ रूप : जानिए सभी देवियों से जुड़ी पौराणिक कथाएं

प्रेरणादायी हैं मां दुर्गा के नौ रूप : जानिए सभी देवियों से जुड़ी पौराणिक कथाएं

1. मां शैलपुत्री 

हिमालय की पुत्री सती के आत्मदाह के बाद, उन्होंने पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया।

विस्तृत कथा : अपने पूर्व जन्म में माता ‘सती’ ने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने पति भगवान शिव का अपमान सहने के बाद योगाग्नि में भस्म कर लिया था। अगले जन्म में वे शैलराज हिमालय की पुत्री बनीं। पर्वत (शैल) की पुत्री होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा।

महत्व : ये वृषभ (बैल) पर सवार हैं और इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल है। इनकी पूजा से व्यक्ति को स्थिरता और अडिगता प्राप्त होती है।

2. मां ब्रह्मचारिणी

तपस्या की प्रतिमूर्ति ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली।

विस्तृत कथा : नारद जी के उपदेश पर माता ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हज़ारों वर्षों तक केवल फल-फूल खाकर और फिर केवल पत्ते (बेलपत्र) खाकर कठिन तपस्या की। अंत में उन्होंने पत्तों को भी खाना छोड़ दिया, जिससे उनका नाम ‘अपर्णा’ पड़ा। उनकी इस कठोर तपस्या से उनका शरीर क्षीण हो गया था, लेकिन उनकी भक्ति देख स्वयं ब्रह्मा जी ने उन्हें वरदान दिया कि उन्हें शिवजी ही पति रूप में प्राप्त होंगे।

महत्व : यह रूप त्याग, वैराग्य और संयम का प्रतीक है।

3. मां चंद्रघंटा

शांति और वीरता का संगम इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है।

विस्तृत कथा : जब असुरों का स्वामी महिषासुर स्वर्ग पर अधिकार कर देवताओं को प्रताड़ित करने लगा, तब देवताओं के तेज से मां का प्राकट्य हुआ। देवी चंद्रघंटा ने अपनी भयंकर घंटा ध्वनि और अस्त्र-शस्त्रों से असुरों का संहार किया। इनका स्वर्ण जैसा चमकीला रंग और दस भुजाएं शत्रुओं के मन में भय पैदा करती हैं, जबकि भक्तों के लिए यह परम शांतिदायक हैं।

महत्व : इनकी उपासना से भक्तों को निर्भयता और वीरता प्राप्त होती है।

4. मां कुष्मांडा

ब्रह्मांड की रचयिता ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली आदि शक्ति।

विस्तृत कथा : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि में केवल अंधकार था, तब मां कुष्मांडा ने अपनी ‘कुष्त’ (अल्प) मुस्कान से ब्रह्मांड का निर्माण किया था। इनमें सूर्यमंडल के भीतर निवास करने की शक्ति है। इनके आठ हाथ हैं जिनमें चक्र, गदा, धनुष-बाण आदि शस्त्र और अमृत कलश व माला है।

महत्व : इनकी भक्ति से आयु, यश और बल की वृद्धि होती है।

5. मां स्कंदमाता

वात्सल्य की देवी कुमार कार्तिकेय (स्कंद) की माता।

विस्तृत कथा : जब तारकासुर नाम के दैत्य ने आतंक मचाया था, तब उसका वध केवल शिव पुत्र के हाथों ही संभव था। भगवान कार्तिकेय को युद्ध के लिए तैयार करने और उन्हें शक्ति प्रदान करने वाली माता स्कंदमाता हैं। देवी अपने पुत्र स्कंद को गोद में लिए हुए सिंह पर विराजमान हैं।

महत्व : माँ का यह रूप ममतामयी है। इनकी पूजा से ज्ञान और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

6. मां कात्यायनी

महिषासुर मर्दिनी महर्षि कात्यायन की पुत्री।

विस्तृत कथा : कत नाम के एक प्रसिद्ध ऋषि थे, उनके पुत्र ऋषि कात्यायन ने मां भगवती को पुत्री के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की। देवी ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की। जब महिषासुर का अत्याचार बढ़ा, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज से देवी कात्यायनी प्रकट हुईं और उन्होंने ही महिषासुर का वध कर देवताओं को मुक्त कराया।

महत्व : विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए मां कात्यायनी की पूजा अमोघ मानी जाती है।

7. मां कालरात्रि

दुष्टों का विनाश अंधकार का नाश करने वाली देवी।

विस्तृत कथा : शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे दैत्यों के संहार के लिए मां ने यह अत्यंत विकराल रूप धारण किया था। इनका रंग काला है, तीन नेत्र हैं और गले में बिजली की माला है। जब रक्तबीज का वध करना कठिन हो गया (क्योंकि उसके रक्त की हर बूंद से नया दानव जन्म ले रहा था), तब मां कालरात्रि ने उसका रक्त जमीन पर गिरने से पहले ही पी लिया और उसका अंत किया।

महत्व : हालांकि इनका रूप डरावना है, लेकिन ये सदैव शुभ फल देती हैं, इसलिए इन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहते हैं।

8. मां महागौरी

पवित्रता की देवी श्वेत वर्ण वाली शांत माता।

विस्तृत कथा : शिव को प्राप्त करने के लिए की गई कठोर तपस्या के दौरान मां का शरीर धूप, धूल और मिट्टी से काला पड़ गया था। जब शिवजी ने प्रसन्न होकर उन पर गंगाजल छिड़का, तो वे विद्युत के समान अत्यंत गोरी और कांतिमय हो गईं। तभी से उनका नाम महागौरी पड़ा। इनके वस्त्र और आभूषण भी श्वेत हैं।

महत्व : महागौरी की पूजा से व्यक्ति के समस्त पाप धुल जाते हैं और मन शुद्ध होता है।

9. मां सिद्धिदात्री

समस्त सिद्धियों की दात्री यह अंतिम और पूर्णता प्रदान करने वाला रूप है।

विस्तृत कथा : शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने माँ शक्ति की तपस्या करके आठों सिद्धियां (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व) प्राप्त की थीं। मां की कृपा से ही शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ और वे ‘अर्धनारीश्वर’ कहलाए। ये देवी कमल पर विराजमान हैं और सभी देवताओं, ऋषियों और मनुष्यों को मनोवांछित फल देती हैं।

महत्व : इनकी पूजा से ब्रह्मांड की हर सिद्धि और सफलता प्राप्त की जा सकती है।

Spread the love