September 10, 2026

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सीएम ने सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर की दिन की शुरुआत, प्रदेशभर में मनाए गए भव्य आयोजन

भोपाल 

हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, विक्रम संवत 2083 और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर दिन की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति और उज्जैन की गौरवशाली परंपरा को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन सदियों से धर्म, ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित परंपराएं आज भी समाज को प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उज्जैन में आयोजित हो रहा विक्रमोत्सव अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय पंचांग और सभी प्रमुख पर्व विक्रम संवत पर आधारित हैं, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसी क्रम में 19 मार्च 2026 को सृष्टि आरंभ दिवस और वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में सुबह 10 बजे सूर्य उपासना और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 

मंत्री प्रभार वाले जिलों में आयोजित कार्यक्रम में होंगे शामिल 
राज्यभर में आयोजित कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर में मौजूद रहेंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा मंदसौर और राजेंद्र शुक्ला रीवा में कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके अलावा कई कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री अपने-अपने आवंटित जिलों में कार्यक्रमों की अगुवाई करेंगे। विक्रमोत्सव–2026 का आयोजन 15 फरवरी से शुरू होकर 19 मार्च तक चलेगा। इस दौरान उज्जैन में विभिन्न सांस्कृतिक, साहित्यिक, धार्मिक और वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। देशभर से आए कलाकार, विद्वान और सांस्कृतिक साधक अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय परंपरा की समृद्ध झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।

भारतीय परंपरा को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास 
उत्सव के अंतर्गत संगीत, नृत्य, नाटक, लोककला और संगोष्ठियों के जरिए सम्राट विक्रमादित्य की परंपरा और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और पर्यटकों की भागीदारी से उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान और भी सशक्त रूप में उभरकर सामने आ रही है। बता दें कि विक्रमोत्सव 2025 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें “लॉन्गस्टैंडिंग आईपी ऑफ द ईयर” और WOW अवॉर्ड शामिल हैं। आने वाले समय में यह उत्सव भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार का सशक्त माध्यम बनेगा। 

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