नईदिल्ली. चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को और ज्यादा आसान और समावेशी बनाने के लिए अहम कदम उठाया है। केरल, असम और पुडुचेरी में अब 2.37 लाख से अधिक बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं को घर बैठे वोटिंग यानी होम वोटिंग की सुविधा दी जाएगी। चुनाव आयोग की इस अच्छी शुरूआत से उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में यह सुविधा देश के अन्य राज्यों में भी लागू की जाएगी।
शुरू हुई होम वोटिंग प्रक्रिया, तय समय में होगी पूरी
आयोग के अनुसार, 30 मार्च 2026 तक मिले आंकड़ों के आधार पर यह सुविधा लागू की गई है। कई निर्वाचन क्षेत्रों में घर-घर जाकर मतदान की प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है और इसे 5 अप्रैल 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अगर किसी कारण से पहली बार मतदान टीम मतदाता तक नहीं पहुंच पाती, तो दूसरी बार भी प्रयास किया जाएगा ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति अपने वोट के अधिकार से वंचित न रहे।
किन मतदाताओं को मिलेगा लाभ?
यह सुविधा खास तौर पर दो वर्गों के लिए लागू की गई है:
85 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक
दिव्यांग (PwD) श्रेणी के मतदाता
यह व्यवस्था जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत लागू की जा रही है। इसके लिए इच्छुक मतदाताओं को अधिसूचना जारी होने के 5 दिनों के भीतर आवेदन करना होता है।
पारदर्शिता के लिए सख्त इंतजाम
चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए दिशा-निर्देश तय किए हैं। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को होम वोटिंग का विकल्प चुनने वाले मतदाताओं की सूची और टीम के दौरे का शेड्यूल पहले से उपलब्ध कराया जाएगा। उम्मीदवार चाहें तो अपने प्रतिनिधि को मतदान टीम के साथ भेज सकते हैं।
मतदान केंद्रों पर भी विशेष व्यवस्था
जो बुजुर्ग या दिव्यांग मतदाता घर से वोटिंग का विकल्प नहीं चुनते, उनके लिए मतदान केंद्रों पर विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें व्हीलचेयर, सहायता कर्मी और अन्य जरूरी इंतजाम शामिल होंगे, ताकि हर मतदाता आसानी से मतदान कर सके।
क्यों अहम है यह फैसला?
भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में हर मतदाता तक पहुंच सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में होम वोटिंग की सुविधा बुजुर्गों और दिव्यांगों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह पहल न सिर्फ मतदान प्रतिशत को बढ़ाएगी, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत और समावेशी बनाएगी।

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