चंडीगढ़
पंचकूला की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को पंचकूला में एक भूखंड के दोबारा आवंटन से जुड़े धनशोधन मामले में आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले को भी बंद कर दिया। यह आदेश पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के 25 फरवरी के एक फैसले के बाद आया है, जिसमें 2021 के उस आदेश को रद्द कर दिया गया था, जिसके तहत इस मामले में हुड्डा और अन्य लोगों पर आरोप तय किए गए थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुड्डा सुनवाई के दौरान खुद अदालत में पेश हुए।
हुड्डा के वकील एस.पी.एस. परमार ने यहां पत्रकारों को बताया कि धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष न्यायाधीश राजीव गोयल ने ईडी की शिकायत को बंद कर दिया क्योंकि हुड्डा और 'नेशनल हेराल्ड' के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को सीबीआई की जांच वाले मुख्य मामले में पहले ही आरोपमुक्त किया जा चुका था।
उच्च न्यायालय ने पंचकूला में एक भूखंड के दोबारा आवंटन के संबंध में हुड्डा और एजेएल के खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोपों को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की पीठ ने अप्रैल 2021 के विशेष सीबीआई अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपियों पर आरोप तय किए गए थे और उनकी आरोपमुक्त करने की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेजों से याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए कथित अपराधों के आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टया भी साबित नहीं होते हैं। अदालत ने माना कि इस मामले में उनके खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं हैं। उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया, ''मुकदमे को जारी रखना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।''
यह मामला 1982 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) द्वारा एजेएल को पंचकूला के सेक्टर 6 में एक भूखंड के आवंटन से जुड़ा है। तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण 1992 में इस प्लॉट को वापस ले लिया गया था। हुडा ने 1995 और 1996 में एजेएल की अपीलें खारिज कर दी थीं। साल 2005 में हुड्डा के हरियाणा के मुख्यमंत्री बनने के बाद, इस भूखंड को एजेएल को मूल दर पर दोबारा आवंटित कर दिया गया।
हरियाणा में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, 2016 में राज्य के सतर्कता ब्यूरो ने एक मामला दर्ज किया, जिसे बाद में सीबीआई ने अपने हाथ में ले लिया। आरोप लगाया गया था कि भूखंड के दोबारा आवंटन से सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान हुआ। अप्रैल 2021 में, विशेष सीबीआई अदालत ने हुड्डा और एजेएल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साज़िश) और 420 (धोखाधड़ी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। इसके बाद हुड्डा ने विशेष सीबीआई अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। ईडी ने 2019 में इस मामले में अपना पहला आरोपपत्र दायर किया था।

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